₹1000 की शराब खरीदते हैं? जानिए आपकी जेब से सरकार के पास कितना जाता है पैसा, टैक्स का पूरा गणित चौंका देगा

देश में शराब GST के दायरे से बाहर है। इसलिए राज्यों को आबकारी शुल्क, VAT और अन्य टैक्स से होती है भारी कमाई। जानिए एक बोतल पर कितना टैक्स वसूला जाता है।

 

नई दिल्ली।

क्या आप जानते हैं कि शराब की एक बोतल खरीदने पर उसकी कीमत का बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में सरकार के पास जाता है? भारत में शराब GST के दायरे से बाहर है, इसलिए राज्य सरकारें अपनी टैक्स नीति के अनुसार इस पर अलग-अलग दरों से कर लगाती हैं। यही वजह है कि कई राज्यों की आय का बड़ा हिस्सा शराब से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर करता है।

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शराब से सरकार को होती है मोटी कमाई

शराब पर लगने वाले टैक्स से राज्य सरकारों को हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व मिलता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 (2020-21) के दौरान देशभर में शराब से जुड़े टैक्स के जरिए करीब ₹1.75 लाख करोड़ की कमाई हुई थी।

वहीं, उत्तर प्रदेश शराब से टैक्स वसूली के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल है। वर्ष 2022-23 में राज्य सरकार ने शराब पर टैक्स के जरिए करीब ₹41,250 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया।

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₹1000 की शराब की बोतल पर कितना टैक्स?

यदि आप ₹1000 की शराब की बोतल खरीदते हैं, तो राज्य के नियमों और ब्रांड के आधार पर उस पर करीब 35% से 50% तक टैक्स हो सकता है।

इसका मतलब है कि:

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  • ₹350 से ₹500 तक की राशि टैक्स के रूप में सरकार के पास जा सकती है।
  • शेष ₹500 से ₹650 में उत्पादक कंपनी की लागत, ट्रांसपोर्ट, डिस्ट्रीब्यूटर, रिटेलर का मार्जिन और अन्य खर्च शामिल होते हैं।

शराब पर कौन-कौन से टैक्स लगते हैं?

शराब की कीमत में सिर्फ एक टैक्स शामिल नहीं होता, बल्कि कई तरह के शुल्क जुड़े होते हैं—

  • एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty): शराब के उत्पादन और बिक्री पर लगने वाला मुख्य कर।
  • VAT (Value Added Tax): राज्य सरकार द्वारा लगाया जाने वाला बिक्री कर।
  • स्पेशल सेस (Special Cess): कुछ राज्यों में विशेष परिस्थितियों या योजनाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क।
  • अन्य शुल्क: लेबल रजिस्ट्रेशन, ब्रांड रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और परिवहन (Transport Fee) जैसी फीस भी कीमत में शामिल हो सकती हैं।

GST से बाहर क्यों है शराब?

मानव उपभोग के लिए बनी शराब को वर्तमान में GST व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसलिए इसकी टैक्स दरें केंद्र सरकार नहीं, बल्कि संबंधित राज्य सरकारें तय करती हैं। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में एक ही ब्रांड की शराब की कीमत अलग हो सकती है।

 

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