भारत में जंक फूड पर नहीं दिखेगा ‘खतरे का निशान’? कंपनियों के विरोध के बाद सरकार के कदम से उठे बड़े सवाल

पुराना स्टॉक खत्म होने की कगार पर, नई पेराई में देरी और बढ़ती मांग ने बिगाड़ा बाजार; आने वाले दिनों में और महंगा हो सकता है गुड़

नई दिल्ली। चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच अब आम लोगों को गुड़ की महंगाई भी परेशान करने लगी है। कभी करीब 40-50 रुपये किलो बिकने वाला गुड़ अब खुदरा बाजार में 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी कुछ ही समय में इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है।

गुड़ की बढ़ती कीमतों का असर खासतौर पर उन घरों पर पड़ सकता है, जहां चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है।

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आखिर क्यों तेजी से बढ़ रहे गुड़ के दाम?

गुड़ की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह पुराने स्टॉक में कमी और नए पेराई सत्र में देरी बताई जा रही है।

पिछले पेराई सत्र का उपलब्ध गुड़ अब लगभग खत्म होने की स्थिति में है। वहीं, नई पेराई शुरू होने में देरी के कारण बाजार में गुड़ की सप्लाई सीमित बनी हुई है।

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जब मांग के मुकाबले बाजार में माल कम होता है तो कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। फिलहाल गुड़ के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है।

चीनी महंगी हुई तो गुड़ की मांग भी बढ़ गई

चीनी की कीमतों में तेजी के बाद कई उपभोक्ता अब चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करने लगे हैं।

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मिठाई, चाय और कई पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले गुड़ की मांग बढ़ रही है। दूसरी तरफ बाजार में उपलब्धता सीमित है। यही वजह है कि मांग और सप्लाई के बीच अंतर बढ़ने से गुड़ के दाम तेजी से ऊपर गए हैं।

एथेनॉल उत्पादन ने भी बढ़ाया दबाव

गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में बढ़ने का असर भी गुड़ की उपलब्धता पर पड़ रहा है।

गन्ने के इस्तेमाल में बदलाव के कारण चीनी के साथ-साथ गुड़ के उत्पादन और बाजार में उसकी आपूर्ति पर भी दबाव बन रहा है। ऐसे में आने वाले समय में नई पेराई और उत्पादन की स्थिति कीमतों के लिए अहम होगी।

भारत दुनिया का बड़ा गुड़ उत्पादक

भारत दुनिया के प्रमुख गुड़ उत्पादक देशों में शामिल है। वैश्विक गुड़ उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई जाती है।

देश में उत्पादित गन्ने का एक बड़ा हिस्सा गुड़ बनाने में इस्तेमाल होता है। घरेलू खपत के अलावा भारत से गुड़ का दूसरे देशों में भी निर्यात किया जाता है।

त्योहारों से और बढ़ सकती है कीमत!

आने वाले त्योहार गुड़ की कीमतों के लिए एक और चुनौती बन सकते हैं। ओणम समेत कई त्योहारों के दौरान मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों में गुड़ की खपत बढ़ जाती है।

अगर नई फसल की पेराई समय पर शुरू नहीं हुई और बाजार में गुड़ की सप्लाई नहीं बढ़ी, तो आने वाले दिनों में इसकी कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है।

यानी चीनी के बाद अब गुड़ की बढ़ती कीमतों ने भी आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है।

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