Tree Farming: खेत की मेड़ को खाली छोड़ रहे हैं तो कर रहे हैं बड़ी गलती! ये पेड़ लगाकर किसान कमा सकते हैं लाखों, फसल पर भी नहीं पड़ेगा असर
खेत की मेड़ पर खेती का ये तरीका बदल सकता है किसानों की कमाई, जानिए कौन से पेड़ देंगे सबसे ज्यादा फायदा

नई दिल्ली: किसान आमतौर पर खेत की मेड़ को सिर्फ जमीन की सीमा मानकर खाली छोड़ देते हैं। लेकिन अगर इसी खाली जगह का सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया तैयार किया जा सकता है।
मेड़ पर कुछ खास किस्म के पेड़ लगाकर किसान अपनी मुख्य फसल के साथ लंबे समय में कमाई कर सकते हैं। खास बात यह है कि सही प्रजाति और उचित दूरी का ध्यान रखा जाए तो इन पेड़ों से मुख्य फसल को नुकसान पहुंचने की संभावना कम रहती है।
यानी जिस जगह को किसान अक्सर बेकार समझते हैं, वही मेड़ आने वाले वर्षों में कमाई का अतिरिक्त साधन बन सकती है।
पॉपलर से मिल सकती है अच्छी कमाई
मेड़ पर पेड़ लगाने की बात हो तो पॉपलर एक लोकप्रिय विकल्प माना जाता है। अनुकूल परिस्थितियों में यह करीब 5 से 6 साल में तैयार हो सकता है।
पॉपलर की लकड़ी का इस्तेमाल प्लाईवुड, माचिस और कागज से जुड़े उद्योगों में किया जाता है। बाजार में इसकी मांग होने के कारण किसान तैयार पेड़ों को बेचकर अतिरिक्त आमदनी हासिल कर सकते हैं।
हालांकि, वास्तविक कमाई पेड़ की संख्या, आकार, गुणवत्ता, स्थानीय बाजार और बिक्री कीमत पर निर्भर करती है।
सागवान: समय ज्यादा, लेकिन लकड़ी की कीमत भी ज्यादा
सागवान (टीक) भी लंबे समय के लिए मेड़ पर लगाया जाने वाला एक प्रमुख पेड़ है। इसकी लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होने के कारण फर्नीचर और अन्य कामों में इस्तेमाल की जाती है।
सागवान को तैयार होने में पॉपलर की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी की बाजार कीमत अधिक हो सकती है। इसलिए यह उन किसानों के लिए विकल्प हो सकता है जो लंबी अवधि का निवेश करना चाहते हैं।
जल्दी कमाई चाहिए तो बांस पर डालें नजर
अगर किसान अपेक्षाकृत कम समय में मेड़ से आय शुरू करना चाहते हैं, तो बांस भी एक विकल्प हो सकता है।
बांस तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों में शामिल है और इसकी कई किस्मों में कुछ वर्षों के भीतर कटाई शुरू की जा सकती है। इसका इस्तेमाल फर्नीचर, टोकरी, निर्माण सामग्री और कई अन्य उत्पादों में होता है।
बांस की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु और बाजार में मांग वाली प्रजाति की जानकारी लेना जरूरी है।
शीशम भी दे सकता है लंबी अवधि में फायदा
शीशम की लकड़ी अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है। इसका इस्तेमाल फर्नीचर बनाने में बड़े पैमाने पर होता है।
मेड़ पर शीशम के पेड़ लगाने से किसान भविष्य के लिए लकड़ी का एक मूल्यवान संसाधन तैयार कर सकते हैं। हालांकि, पेड़ की वृद्धि और अंतिम कमाई स्थानीय परिस्थितियों और बाजार पर निर्भर करेगी।
मेलिया डुबिया भी बन रहा किसानों की पसंद
इन दिनों मेलिया डुबिया को भी व्यावसायिक पौधरोपण के लिए एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। अनुकूल परिस्थितियों में यह अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ सकता है और इसकी लकड़ी का इस्तेमाल प्लाईवुड तथा अन्य उद्योगों में किया जाता है।
किसानों को इसे लगाने से पहले अपने क्षेत्र में इसकी स्थानीय मांग, खरीददार और लकड़ी की कीमत की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
मेड़ पर पेड़ लगाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
मेड़ पर पेड़ लगाना सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं है। सही प्रजाति, पौधों के बीच दूरी और खेत की मुख्य फसल पर पड़ने वाले प्रभाव का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
किसानों को खास तौर पर:
- अच्छी गुणवत्ता वाली नर्सरी से पौधे लेने चाहिए।
- पेड़ों की दूरी ऐसी रखनी चाहिए कि मुख्य फसल को पर्याप्त धूप मिलती रहे।
- अपने क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु के अनुसार प्रजाति का चुनाव करना चाहिए।
- पौधों की नियमित सिंचाई और देखभाल करनी चाहिए।
- लगाने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लेना बेहतर है।
- लकड़ी बेचने से पहले स्थानीय बाजार और खरीदारों की जानकारी जुटानी चाहिए।
मेड़ की खाली जमीन बन सकती है कमाई का जरिया
खेती में आमदनी बढ़ाने के लिए सिर्फ फसल की पैदावार बढ़ाना ही जरूरी नहीं है। खेत की मेड़ जैसी खाली जगह का सही इस्तेमाल भी किसान की अतिरिक्त आय बढ़ाने में मदद कर सकता है।
पॉपलर, सागवान, बांस, शीशम और मेलिया डुबिया जैसी प्रजातियां अलग-अलग अवधि और जरूरत के हिसाब से विकल्प बन सकती हैं। हालांकि, कौन सा पेड़ सबसे ज्यादा फायदेमंद रहेगा, यह आपके क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, उपलब्ध जगह, स्थानीय नियम और बाजार भाव पर निर्भर करता है।












