झारखंड : 95% से कम रिजल्ट आते ही हिला शिक्षा विभाग…हजारीबाग के 59 स्कूलों पर गिरी बड़ी कार्रवाई की गाज
Education Department Shaken as Results Dip Below 95%; Major Action Taken Against 59 Schools in Hazaribagh

हजारीबाग : झारखंड में मैट्रिक परीक्षा परिणाम को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। हजारीबाग जिले में खराब प्रदर्शन करने वाले 59 हाई स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया है। साथ ही सभी संबंधित शिक्षकों और प्राचार्यों से एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जिले की रैंकिंग में आई गिरावट को विभाग ने गंभीर मानते हुए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
राज्य रैंकिंग में पिछड़ा हजारीबाग, विभाग ने दिखाई सख्ती
इस वर्ष जैक मैट्रिक परीक्षा परिणाम में हजारीबाग जिला पूरे राज्य में 14वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि पिछले साल जिला सातवें नंबर पर था। शिक्षा विभाग का मानना है कि यह गिरावट सीधे तौर पर स्कूलों के शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाती है।
डीईओ प्रवीण रंजन ने कहा कि जिन स्कूलों का रिजल्ट खराब रहा है, वहां शिक्षकों की कमी नहीं है। कई स्कूलों में एक ही विषय के दो-दो शिक्षक कार्यरत हैं, इसके बावजूद परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आया।
इन स्कूलों से मांगा गया स्पष्टीकरण
कार्रवाई की जद में आए स्कूलों में पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और पीएमश्री स्कूल देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी और ढौठवा सहित कई अन्य स्कूल शामिल हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार गणित, अंग्रेजी और विज्ञान विषयों में बड़ी संख्या में छात्र फेल हुए हैं। इसी कारण स्कूलों का ओवरऑल रिजल्ट प्रभावित हुआ और जिले की रैंकिंग नीचे चली गई।
आज होगी मैट्रिक और इंटर रिजल्ट की बड़ी समीक्षा बैठक
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह सोमवार को मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम की समीक्षा करेंगे। विभागीय स्तर पर यह तय किया जाएगा कि खराब प्रदर्शन करने वाले स्कूलों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाए।
सचिव ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अन्य जिलों में भी प्राचार्यों और शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। वेतन रोकने और शोकॉज नोटिस जैसे कदम आगे भी जारी रह सकते हैं।
शिक्षकों ने बताई असली परेशानी, बोले- पढ़ाई से ज्यादा गैर शैक्षणिक काम का दबाव
हिंदू प्लस टू स्कूल हजारीबाग के शिक्षकों ने खराब परिणाम के पीछे कई व्यावहारिक समस्याएं गिनाईं। शिक्षकों का कहना है कि नौवीं में नामांकन के दौरान कमजोर छात्रों को भी प्रवेश देना पड़ता है ताकि स्कूलों का इनरोलमेंट बढ़ सके।
उनका कहना है कि कई छात्र ऐसे होते हैं जो बुनियादी लेखन और पढ़ाई में भी कमजोर रहते हैं। इसके बावजूद उन्हें सीधे मैट्रिक परीक्षा तक पहुंचाना पड़ता है।
शिक्षकों ने यह भी कहा कि नौवीं कक्षा में सेंटअप टेस्ट बंद होने से छात्रों की तैयारी का सही आकलन नहीं हो पाता। छात्र बिना पर्याप्त मूल्यांकन के सीधे बोर्ड परीक्षा में बैठ जाते हैं।
चुनाव ड्यूटी से लेकर बैंक खाते तक, शिक्षकों ने गिनाया काम का बोझ
शिक्षकों ने गैर शैक्षणिक कार्यों को भी खराब रिजल्ट का बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि सालभर उन्हें चुनाव ड्यूटी, ट्रेनिंग, बैंक खाता खुलवाने, आय प्रमाण पत्र भरवाने, सावित्री बाई फुले योजना और जनगणना जैसे कामों में लगा दिया जाता है।












