झारखंड सरकार फिर मुश्किल में : JSSC पेपर लीक मामले में भाजपा SIT जांच से संतुष्ट नहीं, बाबूलाल मरांडी बोले, जब तक CBI जांच का ऐलान नहीं होता, तब तक….

रांची। जमीन घोटाले की आंच अभी धीमी भी नहीं पड़ी थी, कि अब JSSC पेपर लीक ने झारखंड सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है। आक्रोश देखते हुए मुख्यमंत्री ने भले ही SIT जांच का आदेश दे दिया हो, लेकिन भाजपा CBI जांच से कम में मानने को तैयार नहीं है। बाबूलाल मरांडी ने दो टूक कहा है कि जब तक राज्य सरकार JSSC घोटाले की सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं करेगी, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे…इस ऐलान के बाद झारखंड की चंपई सरकार की मुश्किलें बढ़नी तय है।

इससे पहले आज ही SIT के लिए टीम गठित कर झारखंड में पेपर लीक की जांच शुरू करायी गयी थी। लेकिन अब जेएसएससी मामले को लेकर भाजपा का जिस तरह से रुख सामने आ रहा है, उससे एक बात तो साफ है कि ये मुद्दा आने वाले दिनों में और भी ज्यादा तूल पकड़ेगा। आपको बता दें कि 28 जनवरी को हुई झारखंड सीजीएल की परीक्षा का पेपर लीक हो गया था, जिसके बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। वहीं चार फरवरी को दूसरे चरण की परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया था।

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भाजपा का कहना है कि इस मामले को तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संरक्षण था। बाबूलाल मरांडी ने प्रेस काँफ्रेंस कर कहा है कि JSSC-CGL प्रश्न पत्र लीक का मामला बेहद संवेदनशील और संगीन है। इस पूरे घोटाले को हेमंत सोरेन के जानकारी में अंजाम दिया गया है। राज्य सरकार छात्रों के उपर एफआईआर दर्ज कर हेमंत के करीबियों को बचाने का प्रयास कर रही है। सरकार द्वारा एसआईटी जांच का आदेश मामले की लीपापोती करने का प्रयास है। इससे हास्यास्पद और क्या हो सकता है कि एक संस्था का चेयरमैन जो रिटायर्ड डीजीपी है, उसके संदिग्ध भूमिका की जांच डीएसपी स्तर का अधिकारी करे… जो उनके सामने खड़े होने से भी डरता हो! जब तक राज्य सरकार JSSC घोटाले की सीबीआई जांच की अनुशंसा नहीं करेगी, तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे…

वहीं राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि, झारखंड में जितने भी कल-कारखाने, खान-खदानें कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई, उसके लिए आदिवासियों को उनके मूल स्थान से विस्थापित किया गया। कांग्रेस ने आदिवासियों से उनकी जल, जंगल, जमीनें छिन ली लेकिन पुनर्वास की व्यवस्था करना भूल गई। कांग्रेस की तीनों पीढ़ियों ने आदिवासी समाज को उपेक्षा और शोषण का दंश दिया है। पिछले 3 दिनों से झारखंड में आदिवासी समाज के प्रति झूठी सहानुभूति व्यक्त करने वाले राहुल गांधी को क्षमायाचना करनी चाहिए।

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