झारखंड : पुलिस विभाग, कर्मचारियों व शिक्षकों से जुड़े कई बड़े फैसलों पर लगी मुहर, SI भर्ती में अब पहले फिजिकल, शिक्षकों को सेवा विस्तार , इंजीनियर को राहत नहीं, पढ़िये डिटेल

रांची। हेमंत कैबिनेट की बैठक में कर्मचारियों के हित में कई बड़े फैसले लिये गये। एक तरफ जहां कर्मचारियों व अधिकारियों को दिवाली गिफ्ट देते हुए हेमंत सरकार ने महंगाई भत्ता को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 46 प्रतिशत कर दिया, वहीं पुलिस विभाग व स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े भी कई अहम फैसले लिये गये।

वायरलेस इंस्पेक्टर भर्ती नियम में बड़ा बदलाव

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कैबिनेट में आज अहम फैसला लेते हुए झारखंड पुलिस रेडियो ऑपरेटर नियमवाली में संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत वायरलेस इंस्पेक्टर नियुक्ति पहले अब फिजिकल होगा, उसके बाद लिखित परीक्षा होगी। पहले लिखित परीक्षा के बाद फिजिकल का प्रावधान था। ऐसे में प्रतिभागियों को काफी दिक्कत होती थी। सारी परीक्षा पास कर जब वो मेडिकल के लिए या फिर फिजिकल देने जाते थे, तो उन्हें पता चलता था कि वो अनफिट हैं। ऐसे में कई अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में पास होने के बाद भी अनफिट होकर भर्ती से वंचित हो जाते थे। लिहाजा अब राज्य सरकार ने तय किया है कि जो फिजिकली और मेडिकली फिट होगा, वही लिखित परीक्षा की अहर्ता रखेगा।

एसटीएफ जवानों के विशेष भत्ता पर कैबिनेट का निर्णय

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वहीं एक बड़ा फैसला STF जवानों को लेकर भी लिया गया है, जिसके तहत एसटीएफ में कार्यरत सभी पुलिस पदाधिकारी और जवानों को दिये जाने विशेष भत्ता को सेवंथ पीआरसी के आलोक में पुनरक्षित करने को राज्य सरकार ने अनुमति दी है। गृह विभाग के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने मुहर लगायी है।

कार्यपालक अभियंता को नहीं मिली राहत

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गोड्डा में पदस्थ सहायक अभियंता संजय कुमार शर्मा ने दंड से राहत के लिए राज्यपाल के पास अपील की थी। राज्यपाल ने ये अभ्यावेदन राज्य सरकार को भेज दिया था। कैबिनेट की बैठक में संजय शर्मा की सजा को बरकरार रखने का फैसला लिया है।

स्कूल व शिक्षकों से जुड़े ये फैसले लिये गये

कल्याण विभाग के तहत संचालित आवासीय विद्यालय में कार्यरत अंशकालिक शिक्षकों को 1 साल का अवधि विस्तार दिया गया है। इस दौरान नयी नियुक्ति की प्रक्रिया चलेगी। वहीं 1981 से 84 के बीच प्रोजेक्ट विद्यालयों में प्रबंध समिति के द्वारा रखे गए शिक्षकों को जिन्हें अमान्य किया गया था, उन्हें फिर से सेवा में रखे जाने की प्रस्ताव को स्वीकृति मिली। दरअसल अमान्य किये जाने के बाद ये सभी शिक्षक सुप्रीम कोर्ट गये थे। जहां से कमेटी बनाने का निर्देश दिया गया था। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि जो शिक्षक शर्तों के अनुरूप है, उउन्हें सेवा में रखा जायेगा, बाकियों की सेवा निरस्त कर दी जायेगी। शर्तों को पूरा रने वालों को विद्यालयों में सहायक शिक्षकों के मान्यता प्रदान करने को लेकर स्वीकृति दी गयी है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रमंडलीय स्तरीय कार्यालय के लिपिक एवं आदेशपाल के रीस्ट्रक्चर करने को स्वीकृति दी गयी है। प्रमंडलीय कार्यालयों में पदस्थ 642 लिपिक व 801 आदेशपालकों के पदों की पुर्नसंरचना की जायेगी।

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