5 महीने बाद घर लौट रही झारखंड की बेटी प्रीति कुजूर! ओमान में फंसी युवती की वापसी से परिवार में खुशी की लहर

सीएम हेमंत सोरेन के निर्देश और भारतीय दूतावास के प्रयासों से संभव हुई सुरक्षित वापसी, मार्च में नौकरी के झांसे में विदेश गई थीं प्रीति

रांची। करीब पांच महीने तक ओमान में फंसी रहने के बाद झारखंड की बेटी प्रीति कुजूर आज अपने घर लौट रही हैं। सिमडेगा जिले की रहने वाली प्रीति की सुरक्षित वापसी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश, राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष और भारतीय दूतावास (मस्कट) के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सकी है।

जानकारी के अनुसार, प्रीति शनिवार को भारत के लिए रवाना हो चुकी थीं और रविवार को अपने गृह राज्य झारखंड पहुंचने की उम्मीद है। उनकी वापसी की खबर से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है।

नौकरी का झांसा देकर भेजा गया विदेश

परिजनों के मुताबिक, मार्च 2026 में एक एजेंट ने प्रीति को दुबई में 45 से 50 हजार रुपये मासिक वेतन वाली नौकरी का लालच देकर विदेश भेजा था। लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें कथित तौर पर 23 से 25 हजार रुपये के वेतन पर काम कराया गया।

जब प्रीति ने भारत लौटने की इच्छा जताई, तो कंपनी मालिक ने उन्हें वापस भेजने के बदले बड़ी रकम की मांग की। परिवार ने 1.92 लाख रुपये भी भेजे, लेकिन इसके बावजूद उनकी घर वापसी नहीं हो सकी।

बहन की गुहार के बाद शुरू हुई कार्रवाई

प्रीति की बहन रंतु कुजूर, जो सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड के मरारोमा गंझूटोली की निवासी हैं, ने 19 जून को सरकार से मदद की अपील की थी।

इसके बाद राज्य प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष ने भारतीय दूतावास (मस्कट) को पत्र भेजकर प्रीति की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया और उनके दस्तावेज वापस दिलाने तथा वापसी की प्रक्रिया आसान बनाने का अनुरोध किया।

सीएम हेमंत सोरेन ने दिए थे तत्काल निर्देश

मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर 23 जून को मामला प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स, रांची और भारतीय दूतावास, मस्कट को भेजा गया। इसके अगले दिन 24 जून को भारतीय दूतावास ने प्रीति से संपर्क कर उनकी सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया शुरू की।

संयुक्त प्रयासों से मिली सफलता

राज्य सरकार, प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष और भारतीय दूतावास के समन्वित प्रयासों के बाद आखिरकार प्रीति कुजूर की स्वदेश वापसी संभव हो सकी। यह मामला विदेशों में रोजगार के नाम पर होने वाले कथित फर्जीवाड़े और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

अब पांच महीने बाद प्रीति की घर वापसी से उनके परिवार ने राहत की सांस ली है और पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।

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