मुकेश अंबानी की कैंपा ने झटका दिया कोक-पेप्सी को! 60 हजार करोड़ के बाजार में अब छोटे ब्रांडों की धमाकेदार एंट्री

नई दिल्ली: जब मुकेश अंबानी ने अपनी पुरानी कोला कंपनी कैंपा को खरीदा, तो पेप्सी और कोक के लिए यह सिर्फ एक चेतावनी थी। अब आंकड़े इस सच को बयान कर रहे हैं: देश के 60,000 करोड़ के शीतल पेय बाजार में नए और छोटे खिलाड़ी अपनी छाप छोड़ने में कामयाब हो रहे हैं।
कैंपा और लाहौरी ने दी बड़ी चुनौती
नीलसनआईक्यू के आंकड़ों के मुताबिक, रिलायंस की कैंपा और बेल्जियम की निजी इक्विटी फर्म वर्लिनवेस्ट समर्थित लाहौरी ज़ीरा ने जनवरी-सितंबर 2025 में अपनी संयुक्त बाजार हिस्सेदारी दोगुनी कर लगभग 15% कर ली। इसके चलते कोका-कोला और पेप्सिको की हिस्सेदारी गिरकर 85% रह गई।
छोटे ब्रांडों का बड़ा प्लान
लाहौरी ज़ीरा के को-फाउंडर निखिल डोडा ने बताया कि अगले साल नेशनल लेवल पर उनकी उपस्थिति बढ़ेगी और 80-90% पिन कोड कवर होंगे। लाहौरी आमरस और मसाला कोला जैसे नए वेरिएंट्स के साथ कंपनी अब 2,500 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर के माध्यम से अपनी पहुंच बढ़ा रही है।
रिलायंस की रणनीति
रिलायंस इंडस्ट्रीज की FMCG आर्म RCPL ने कई बड़े समझौते किए हैं:
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कोक-पेप्सी को बड़ा झटका
नए ब्रांडों की तेजी से बढ़ती हिस्सेदारी ने कोका-कोला और पेप्सिको को 10 रुपये के नए पैक पेश करने के लिए मजबूर किया। विश्लेषकों के मुताबिक, यह पहली बार है कि मल्टीनेशनल कंपनियों का एकाधिकार सीरियस चुनौती का सामना कर रहा है।
मार्केट में नई प्रतिस्पर्धा
वरुण बेवरेजेस के चेयरमैन रवि जयपुरिया ने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा बाजार के लिए स्वस्थ और फायदेमंद है। हालांकि नए खिलाड़ियों की वजह से कुछ मामूली असर जरूर होगा, लेकिन लंबी अवधि में यह उद्योग के लिए सकारात्मक साबित होगा।
इस बदलाव ने साबित कर दिया है कि अब पुराने दिग्गजों की नींद उड़ी है और छोटे खिलाड़ी अपनी ताकत दिखाने लगे हैं।









