“लू से किसी की भी मौत ना हो” भीषण गरमी और लू के बीच केंद्रीय मंत्री ने की राज्य के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ मीटिंग, हीट वेव को लेकर दिये जरूरी निर्देश

रांची। भीषण गरमी के कहर के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यों के स्वास्थ्य मंत्री के साथ बैठक की।
बैठक में प्रदेश में गरमी से बिगड़े हालात, अस्पतालों की व्यवस्था और दवाईयों की उपलब्धता सहित कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की गी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि पांच सदस्यीय टीम, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय, एनडीएमए, आईएमडी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों का दौरा करेगी।
मंडाविया ने कई राज्यों में मौजूदा लू की स्थिति के बीच देश की तैयारियों की समीक्षा के लिए पहली बार यहां एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। मंडाविया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, स्वास्थ्य मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वरिष्ठ अधिकारियों वाली पांच सदस्यीय टीम हीटवेव की स्थिति से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों का दौरा करेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को भी हीटवेव के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के उपाय सुझाने का निर्देश दिया गया है। मंत्री ने कहा, आम जीवन की सुरक्षा के लिए हर स्तर पर व्यवस्था की जाएगी। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लू लगने से किसी की मौत न हो।
बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, हरियाणा, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे कई राज्य लू जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में बिहार और ओडिशा समेत लू लगने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। लू की स्थिति को देखते हुए कई राज्यों ने गर्मी की छुट्टियां बढ़ा दी हैं।
कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा
• वज्रपात को राष्ट्रीय आपदा में सम्मिलित किया जाए.
• सभी जिलों में आपदा मित्र की स्वीकृति दी जाए.
• आपदा प्रबंधन द्वारा राज्यांश निर्गत करने की अवधि को अधिसीमा को बढ़ा कर 60 दिन किया जाए. पहले इसकी अवधि मात्र 15 दिन की थी.
• लू को राष्ट्रीय आपदा में सम्मिलित किया जाए.
• लू अथवा शीत लहर के कारण हुई मृत्यु को मृत्यु का कारण स्पष्ट करना आवश्यक है. भारत तरकार को इसकी स्पष्ट मार्गनिर्देश उपलब्ध कराया जाए.
• अगजनी के प्रकार को परिभाषित करें के प्राकृतिक आग अथवा मानव जनित है.
• पूर्व घोषित सुखाड़ हेतु भारत सरकार ते क्षतिपूर्ति हेतु कल 9600 करोड़ की नियमानुसार सहयोग राशि की मांग किया गया था. उसकी विमुक्ति किया जाए.












