अब बुखार भी पड़ेगा महंगा! पेट्रोल के बाद दवाइयों पर महंगाई का हमला, 384 जरूरी मेडिसिन के दाम बढ़ाने की तैयारी

नई दिल्ली। महंगे पेट्रोल-डीजल और लगातार बढ़ती रोजमर्रा की लागत के बीच अब आम लोगों को एक और बड़ा झटका लग सकता है। इस बार असर सीधे स्वास्थ्य पर पड़ने वाला है। केंद्र सरकार देश में इस्तेमाल होने वाली 384 जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू हुआ तो बुखार, इंफेक्शन, बीपी और दिल की बीमारियों तक की दवाएं लोगों की जेब पर भारी पड़ेंगी।
सूत्रों के मुताबिक National Pharmaceutical Pricing Authority, औषधि विभाग और वाणिज्य मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दवा कंपनियों ने बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला देते हुए सरकार से दाम बढ़ाने की मांग की है।
बताया जा रहा है कि इस संभावित महंगाई के पीछे पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संकट को बड़ी वजह माना जा रहा है। दरअसल कई जरूरी दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल पेट्रोकेमिकल्स से तैयार होता है। युद्ध और सप्लाई चेन प्रभावित होने की वजह से इन रॉ मैटेरियल की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं।
फार्मा कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत में भारी इजाफा होने से दवाओं को पुराने दाम पर बनाना मुश्किल होता जा रहा है। यही वजह है कि सरकार अब कीमतों में सीमित बढ़ोतरी के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है।
हालांकि अधिकारियों ने यह भी संकेत दिए हैं कि यह बढ़ोतरी स्थायी नहीं होगी। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होंगे और कच्चे माल की सप्लाई दोबारा पटरी पर लौटेगी, वैसे ही दवाओं की कीमतें कम की जा सकती हैं।
जिन दवाओं के महंगे होने की संभावना जताई जा रही है, उनमें रोजाना इस्तेमाल होने वाली कई अहम मेडिसिन शामिल हैं।
Paracetamol — बुखार और बदन दर्द में इस्तेमाल होने वाली सबसे आम दवा।
Amoxicillin — बैक्टीरियल संक्रमण के इलाज में उपयोगी एंटीबायोटिक।
Azithromycin — गले और फेफड़ों के संक्रमण में इस्तेमाल होने वाली दवा।
Amlodipine — हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों के मरीजों के लिए जरूरी दवा।
Atorvastatin — शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा।
Dexamethasone — सूजन और कई गंभीर बीमारियों के इलाज में उपयोगी।
Ascorbic Acid — विटामिन C की कमी और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा।
अगर दवाओं के दाम बढ़ते हैं तो इसका सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और रोजाना दवाओं पर निर्भर मरीजों पर पड़ सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग, बीपी, डायबिटीज और दिल के मरीजों की मासिक मेडिकल लागत और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।












