झारखंड: बैंक में PO की नौकरी छोड़ करने लगा पेपर लीक, पत्नी है डॉक्टर, JSSC के फर्जी पेपर लीक मामले में चौकाने वाला खुलासा

Jharkhand: Quits Bank PO Job to Orchestrate Paper Leaks—Wife is a Doctor; Shocking Revelations in the JSSC Fake Paper Leak Scandal

जेएसएससी उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साल्वर गैंग का खुलासा किया है। गिरोह ने अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये ऐंठे, जबकि बरामद प्रश्नपत्र फर्जी निकले। अब साल्वर गैंग को लेकर नया खुलासा हुआ है।

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रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े एक मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रांची पुलिस ने पेपर लीक के नाम पर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपये ठगने वाले एक अंतरराज्यीय साल्वर गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में गिरोह के सरगना अतुल वत्स समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

 

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पुलिस के अनुसार, 12 अप्रैल को झारखंड के आठ जिलों में आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से एक दिन पहले ही प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिली थी। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने शनिवार रात तमाड़ क्षेत्र में स्थित एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में छापेमारी की। इस दौरान 159 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर उत्तर रटवाए जा रहे थे।

 

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प्रश्न पत्र निकला फर्जी

हालांकि, जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को दिया गया प्रश्नपत्र पूरी तरह फर्जी था। गिरोह के सदस्य पेपर लीक का झांसा देकर उम्मीदवारों से भारी रकम वसूल रहे थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से 15-15 लाख रुपये की डील की गई थी। इस तरह गिरोह ने करीब 23 करोड़ 85 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया।

 

बैंक पीओ था साल्वर गैंग का मास्टरमाइंड

गिरफ्तार सरगना अतुल वत्स मूल रूप से बिहार के जहानाबाद जिले का रहने वाला है और फिलहाल Patna के बोरिंग रोड इलाके में रह रहा था। उसके खिलाफ पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। बताया जा रहा है कि वह पहले बैंक में प्रोबेशनरी ऑफिसर (PO) के पद पर कार्यरत था, लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़कर इस अवैध धंधे को अपना लिया।

रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेएसएससी के अध्यक्ष Prashant Kumar, रांची के उपायुक्त Manjunath Bhajantri और एसएसपी Rakesh Ranjan ने संयुक्त रूप से मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि बरामद प्रश्नपत्र का असली परीक्षा से कोई संबंध नहीं था। कुल 120 प्रश्नों में से केवल चार प्रश्न ही आंशिक रूप से मेल खाते पाए गए, जबकि अन्य सभी प्रश्न पूरी तरह अलग थे।

 

 

आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पेपर लीक का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इस पूरे मामले को सुनियोजित ठगी करार दिया गया है, जिसमें अभ्यर्थियों की नौकरी पाने की इच्छा का फायदा उठाया गया।इस मामले में पुलिस ने गिरोह के नेटवर्क की भी जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि इस गैंग के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और इसमें एजेंटों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जो अभ्यर्थियों को फंसाने का काम करता था।

 

वहीं, जेएसएससी ने भी सख्त रुख अपनाते हुए पकड़े गए 159 अभ्यर्थियों को आयोग की सभी परीक्षाओं से डिबार करने का निर्णय लिया है। उनके खिलाफ झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम 2023 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस कानून के तहत नकल या फर्जीवाड़े में शामिल पाए जाने पर एक से तीन साल तक की सजा और पांच लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है, जबकि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

 

जांच में यह भी सामने आया है कि अतुल वत्स ने दिल्ली के एक मास्टरमाइंड से परीक्षा में सेटिंग और फर्जीवाड़ा करने की तकनीक सीखी थी। वह पहले भी ऐसे मामलों में गिरफ्तार हो चुका है और तिहाड़ जेल भी जा चुका है।

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