5 पूर्व मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ी: हेमंत कैबिनेट ने 5 पूर्व मंत्रियों पर पीई दर्ज करने की दी अनुमति, जानिये क्या है पूरा मामला

रांची। झारखंड के पांच पूर्व मंत्रियों की मुश्किलें बढ़ गयी है। हेमंत कैबिनेट ने आज झारखण्ड सरकार के पूर्व मंत्रियों यथा (1) अमर कुमार बाउरी, (2) रणधीर कुमार सिंह, (3) डॉ० नीरा यादव, (4) लुईस मरांडी एवं (5) नीलकंठ सिंह मुण्डा के विरूद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन की जॉच हेतु पी०ई० दर्ज करने की अनुमति दिये जाने की स्वीकृति दी गई। इससे पहले साल 2022 में ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्रिमंडल सचिवालय और निगरानी विभाग को करप्शन के मामले में पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार में शामिल रहे 5 पूर्व मंत्रियों के खिलाफ पी.ई (प्राथमिक जांच) दर्ज करने का आदेश दिया था। जिन पूर्व मंत्रियों के खिलाफ पी.ई. दर्ज करने का निर्देश दिया गया था, उनमें अमर कुमार बाउरी, रणधीर कुमार सिंह, डॉ0 नीरा यादव, लुईस मरांडी और नीलकंठ सिंह मुंडा शामिल थे। इनमें से लुईस मरांडी को छोड़ कर चार अन्य नेता वर्ष 2019 के चुनाव में भी जीत हासिल कर फिर से विधानसभा पहुंचे हैं।

पूर्व मंत्रियों के विरुद्ध प्रत्यानुपातिक धनार्जन (आय से अधिक संपत्ति हासिल करने) की जांच के लिए पी.ई दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी।‘झारखंड उच्च न्यायालय में पिछली सरकार के मंत्रियों को लेकर आय से अधिक संपत्ति मामले में दर्ज जनहित याचिका के संदर्भ में राज्य सरकार ने एसीबी जांच का आदेश दिया है.”

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इससे पहले साल 2020 में पंकज कुमार यादव नाम के व्यक्ति ने झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर पूर्ववर्ती रघुवर सरकार के पांच मंत्रियों की संपत्ति की जांच की मांग की थी. हेमंत सरकार ने कहा कि उसी जनहित याचिका को ही आधार बनाकर पूर्व सरकार के पांच मंत्रियों की संपत्ति की जांच का आदेश मुख्यमंत्री ने एसीबी को दिया है. उस याचिका में याचिकाकर्ता ने रघुवर दास सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी, नीरा यादव, नीलकंठ सिंह मुंडा, रणधीर सिंह और लुईस मरांडी के पास आय से अधिक संपत्ति होने का आरोप लगाया था. अब राज्य सरकार ने इन्हीं पांचों पूर्व मंत्रियों की संपत्ति की जांच करने के आदेश एसीबी को दिए हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक हड़कंप मच गया है।

गौरतलब है कि रघुवर दास की सरकार में मंत्री रहे सरयू राय गातार पूर्ववर्ती सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं और उन्होंने कई मौकों पर राज्य सरकार से उन मामलों की जांच की मांग भी की थी।

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