रांची: IFS राजीव लोचन बख्शी की ACB की शिकायत, बाबूलाल मरांडी ने लिखा पत्र, करोड़ों रुपये के गबन व साक्ष्य मिटाने का आरोप…
Ranchi: ACB files complaint against IFS Rajiv Lochan Bakshi, Babulal Marandi writes letter alleging embezzlement of crores of rupees and destruction of evidence...

झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एसीबी को पत्र लिखकर भारतीय वन सेवा के अधिकारी राजीव लोचन बख्शी पर करोड़ों रुपये के गबन और साक्ष्य मिटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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रांची। झारखंड में भ्रष्टाचार को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को पत्र लिखकर भारतीय वन सेवा (IFS) के वरिष्ठ अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। मरांडी ने इस मामले में तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने ACB के अपर पुलिस महानिदेशक को भेजे अपने पत्र में कहा है कि राजीव लोचन बख्शी, जो पूर्व में रांची वन प्रमंडल के डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) के पद पर पदस्थ थे, उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए करोड़ों रुपये के सरकारी धन का गबन किया। मरांडी के अनुसार, यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें साक्ष्यों को मिटाने और पूरे मामले को दबाने की भी कोशिश की गई है।


नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि बख्शी के कार्यकाल के दौरान कई परियोजनाओं में वित्तीय गड़बड़ी सामने आई थी, लेकिन उस समय उचित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभाव और पद के चलते मामले को दबा दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी हो गई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल इस मामले को लेकर सरकार पर हमलावर हो गए हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
ACB को भेजे गए इस पत्र के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एजेंसी इस पर क्या कदम उठाती है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला राज्य में प्रशासनिक भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण बन सकता है और कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।












