रांची की बेटियों ने रचा इतिहास, अंडर 18 टीम इंडिया में जगह बनाकर बढ़ाया झारखंड का मान
The daughters of Ranchi have scripted history, bringing glory to Jharkhand by securing a spot in the Under-18 Team India squad.

रांची के बरियातू इलाके से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे झारखंड को गर्व से भर दिया है। मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय सह आवासीय हॉकी प्रशिक्षण केंद्र की तीन होनहार खिलाड़ी — Neelam Topno, Sugan Sanga और Khili Kumari — का चयन भारतीय अंडर 18 महिला हॉकी टीम में हुआ है। ये खिलाड़ी 15 से 20 मई के बीच भोपाल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। फिलहाल तीनों खिलाड़ी भोपाल में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में तैयारी में जुटी हुई हैं।
कम संसाधन, लेकिन इरादे आसमान से ऊंचे
इन बेटियों की उपलब्धि केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन और अडिग आत्मविश्वास की मिसाल है। कोच करुणा पूर्ति के अनुसार, सीमित सुविधाओं के बावजूद इन खिलाड़ियों ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। लगातार अभ्यास, अनुशासित दिनचर्या और खेल के प्रति समर्पण ने इन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि झारखंड की मिट्टी में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही दिशा और अवसर की होती है।
सरकारी स्कूल की छात्राएं अब बदल रही हैं धारणा
विद्यालय के प्राचार्य दीपक कुमार ने इस उपलब्धि को एक बड़ी सामाजिक सोच में बदलाव के रूप में देखा है। उनका मानना है कि अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी भी हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रहे हैं। यह सफलता उन धारणाओं को तोड़ती है, जिनमें माना जाता है कि बड़े मंच तक पहुंचने के लिए केवल निजी संस्थानों की जरूरत होती है। इन खिलाड़ियों की कहानी अब अन्य छात्राओं के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
हॉकी की नई नर्सरी बना बरियातू, परंपरा को आगे बढ़ाती नई पीढ़ी
बरियातू का यह प्रशिक्षण केंद्र पहले भी कई नामी खिलाड़ियों को देश को दे चुका है। भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान Nikki Pradhan और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी Beauty Dungdung इसी केंद्र की देन हैं। अब नीलम, सुगन और खिली उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। यही कारण है कि यह केंद्र अब झारखंड में महिला हॉकी की मजबूत नर्सरी के रूप में स्थापित हो चुका है।
हाल ही में आयोजित सब जूनियर राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में भी इन तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। उनके योगदान से झारखंड टीम ने लगातार तीसरी बार खिताब अपने नाम किया। इसी प्रदर्शन ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और अब उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का मौका मिला है।
अब नजर सीनियर टीम इंडिया पर, बड़ा सपना बाकी है
तीनों खिलाड़ियों ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच, शिक्षकों और साथियों को दिया है। उनका कहना है कि सामूहिक सहयोग और निरंतर अभ्यास ने ही उन्हें यहां तक पहुंचाया है। अब उनका अगला लक्ष्य भारतीय सीनियर महिला हॉकी टीम में जगह बनाना है और देश के लिए बड़े मंच पर खेलते हुए तिरंगे का मान बढ़ाना है।
यह कहानी सिर्फ तीन खिलाड़ियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन अनगिनत बेटियों के सपनों की झलक है जो छोटे शहरों और साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर बड़े मुकाम हासिल करने का हौसला रखती हैं।












