रिम्स निदेशक फिर हाईकोर्ट के कटघरे में…नियुक्ति मामले में पूछा -क्यों न हो अवमानना की कारवाई..

रांची रिम्स में इलाज के लचार व्यवस्था और रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर एक बार फिर से रिम्स प्रशासन हाईकोर्ट के कटघरे में है। हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए रिम्स निदेशक डॉक्टर कामेश्वर प्रसाद को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है की क्यों ना आपके खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज कराया जाए।
आपको बता दें की 28 जनवरी 2022 को 4 माह के अंदर सभी स्वीकृत खाली पदों का भरने का आदेश हाईकोर्ट ने दिया था। जिनका अनुपालन अब तक नहीं हो पाया है। हाई कोर्ट ने स्वत संज्ञान मामले में पूछा है की सभी रिक्त पदों पर नियुक्ति क्यों नहीं की गई? इसके अलावा चतुर्थ वर्ग के 467 विभिन्न पदों पर नियुक्ति के लिए जो विज्ञापन निकाला गया था उसमें झारखंड के नागरिकों जिसे बाद में सुधार कर झारखंड के निवासियों से आवेदन क्यों मांगा गया? विज्ञापन में सुधार की अनुमति किस कानून,नियम,सर्कुलर या सरकार के आदेश से इस तरह का आवेदन को मांगा गया है।
इस मामले की सुनवाई के दौरान डा अशोक कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने खंडपीठ को बताया की उन्होंने स्व विवेक से निदेशक को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को नहीं कहा था। उन्होंने आग्रह किया खंड-पीठ ने उनकी आग्रह को स्वीकार किया और निदेशक पर उपस्थित रहने का दवाब नहीं दिया।
सुनवाई के दौरान निदेशक के कोर्ट में उपस्थित नहीं रहने पर अदालत ने नाराजगी जताई थी। 18 नवंबर के पूर्व कारण बताओ नोटिस का जवाब दायर करने का निर्देश भी दिया। वहीं रिम्स में चतुर्थ वर्ग के 467 विभिन्न पदों पर चल रही नियुक्ति प्रक्रिया के तहत चयनित अभ्यर्थियों को अगले आदेश तक नियुक्ति पत्र देने पर भी खंडपीठ ने रोक लगा दी थी। रिम्स में पूर्व से कार्यरत कर्मियों की सेवा नियमित करने को लेकर दायर याचिकाओं पर कोई आदेश पारित नहीं किया। मामले की अगली सुनवाई खंडपीठ ने 18 नवंबर की तिथि निर्धारित की।











