अचानक आसमान से उतरी तबाही! उखड़े पेड़…टूटे बिजली खंभे…मिनटों में उजड़ गए सैकड़ों घर…

चेन्नई। तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले में रविवार शाम अचानक आए भीषण तूफान ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे में तब्दील हो गया। तेज हवाओं के साथ उठे धूल और मलबे के विशाल गुबार ने लोगों में दहशत फैला दी। कई लोगों ने इसे बवंडर समझ लिया, जबकि मौसम वैज्ञानिकों ने बाद में इसकी वास्तविक वजह स्पष्ट की।
इस प्राकृतिक घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में धूल और मलबे का विशाल घूमता हुआ स्तंभ आसमान की ओर उठता दिखाई दे रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।
200 घरों की छतें उड़ीं, पेड़ और खंभे धराशायी
तूतुकुड़ी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर तूतुकुड़ी-तिरुनेलवेली हाईवे पर स्थित वागाईकुलम और मुडिवैथनेन्दल गांव इस तूफान से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, करीब 200 घरों की छतें उड़ गईं। कई पेड़ जड़ से उखड़ गए और बिजली के खंभे टूटकर जमीन पर गिर पड़े। लोगों के घरों में रखा सामान तेज हवाओं के साथ दूर-दूर तक बिखर गया।
तूफान की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कुछ मिनटों के भीतर पूरे इलाके का दृश्य बदल गया।
थीम पार्क और टोल प्लाजा को करोड़ों का नुकसान
तूफान का असर हाईवे किनारे स्थित एक निजी थीम पार्क पर भी पड़ा। पार्क के कई झूले और मशीनें क्षतिग्रस्त हो गईं। वहीं पास के टोल प्लाजा के शीशे, कंप्यूटर सिस्टम और अन्य उपकरण भी बुरी तरह टूट गए।
स्थिति को देखते हुए कुछ समय के लिए टोल वसूली बंद करनी पड़ी और वाहनों को बिना शुल्क के गुजरने दिया गया।
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 5 से 6 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है।
क्रिकेट खेल रहे बच्चों पर भी मंडराया खतरा
घटना के दौरान मैदान में क्रिकेट खेल रहे नौ बच्चों की जान भी खतरे में पड़ गई थी। ग्रामीणों के मुताबिक हवाएं इतनी तेज थीं कि बच्चों को लगा जैसे वे जमीन से ऊपर उठ रहे हों।
स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सभी बच्चों ने एक-दूसरे को मजबूती से पकड़ लिया और जमीन पर बैठ गए। इसी सूझबूझ के कारण कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
आखिर क्या था यह रहस्यमयी गुबार?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद कई लोगों ने इसे बवंडर बताया, लेकिन चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र (RMC) ने इस दावे को खारिज कर दिया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण तमिलनाडु के ऊपर लगभग 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर विशेष वायुमंडलीय परिस्थितियां बनने से ‘क्युम्युलोनिम्बस’ नामक घने बादल विकसित हुए थे। इन बादलों के प्रभाव से जमीन से हवा तेजी से ऊपर की ओर उठी, जिससे धूल और मलबा घूमते हुए आसमान की ओर जाने लगा।
इसी कारण यह दृश्य बवंडर जैसा दिखाई दिया, जबकि वास्तव में यह स्थानीय स्तर पर उत्पन्न अत्यधिक तेज हवाओं का प्रभाव था।
राहत की बात, कोई जनहानि नहीं
इतनी बड़ी तबाही के बावजूद राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई। केवल दो लोगों के मामूली रूप से घायल होने की सूचना है।
हालांकि, प्रभावित गांवों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और प्रशासन नुकसान का आकलन करने के साथ राहत कार्यों में जुटा हुआ है।









