सीक्रेट ऑपरेशन में खुला यौन शोषण का काला सच,कंपनी में 40 दिन का खौफनाक जाल,नौकरी के बहाने अंदर घुसीं महिला पुलिसकर्मी, जो सामने आया उसने उड़ा दिए होश

नासिक की ! मीटिंग रूम से लेकर HR तक पर उठे गंभीर सवाल, CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस


महाराष्ट्र के नासिक से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक नामी मल्टी-नेशनल कंपनी के भीतर चल रहे कथित यौन शोषण के नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस को बेहद गुप्त और जोखिम भरा ऑपरेशन चलाना पड़ा। इस पूरे खुलासे ने कॉर्पोरेट दुनिया के अंदर छिपे एक खौफनाक सच को उजागर कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, सात महिला पुलिसकर्मियों की एक टीम ने अपनी असली पहचान छिपाकर कंपनी में नौकरी ज्वाइन की और करीब 40 दिनों तक अंदर रहकर हर गतिविधि पर नजर रखी। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ सबूत जुटाए, बल्कि मुख्य आरोपी को महिला कर्मचारियों के साथ आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

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जांच के दौरान सामने आया कि कंपनी के भीतर मीटिंग्स के दौरान महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया जाता था। इस पूरे मामले को साबित करने के लिए पुलिस अब 40 से अधिक CCTV फुटेज की गहन जांच कर रही है, जिससे आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जा सकें। स्थानीय लोगों और पीड़ितों के अनुसार, यह सिलसिला पिछले चार सालों से जारी था, जिसमें न केवल यौन उत्पीड़न बल्कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसे आरोप भी शामिल हैं।

इस मामले में अब तक छह लोगों के खिलाफ नौ केस दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें एक टीम लीडर और HR विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। पीड़ित महिलाओं की उम्र 18 से 25 वर्ष के बीच बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद कंपनी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया और पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही है।

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जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी की एक HR मैनेजर ने पीड़िता द्वारा भेजी गई शिकायत ई-मेल को नजरअंदाज कर दिया था, जिससे मामला और गंभीर हो गया। फिलहाल वह पुलिस रिमांड पर है और उससे पूछताछ जारी है।

पूरे मामले की शुरुआत 26 मार्च को हुई, जब एक महिला कर्मचारी ने देवलाली पुलिस स्टेशन में अपने सीनियर के खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 26 मार्च से 3 अप्रैल के बीच अलग-अलग चरणों में कुल आठ FIR दर्ज की गईं।

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इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी संदीप कार्णिक ने की, जिनके निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस के अनुसार, फरवरी महीने से ही आरोपियों की गतिविधियों पर गुप्त रूप से नजर रखी जा रही थी, जिसके बाद इस बड़े खुलासे को अंजाम दिया गया।

फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या बड़े कॉर्पोरेट दफ्तरों के भीतर भी महिलाओं की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित है, या फिर ऐसे कई राज अभी भी अंधेरे में छिपे हुए हैं।

 

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