ISIS का खूंखार चेहरा खत्म! अफ्रीका में छिपा बैठा था दुनिया का सबसे खतरनाक आतंकी, अमेरिकी सेना ने ऐसे किया ढेर
कई बार मौत को दे चुका था मात, लेकिन इस बार नहीं बच सका ISIS का ‘शैडो कमांडर’

दुनिया के सबसे खूंखार आतंकियों में शामिल ISIS कमांडर अबू-बिलाल अल-मिनुकी आखिरकार मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए दावा किया कि अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सेना के संयुक्त ऑपरेशन में इस आतंकी का खात्मा कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि अल-मिनुकी ISIS का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर था और लंबे समय से अमेरिका की खुफिया एजेंसियों की रडार पर था।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए लिखा कि उनके निर्देश पर अमेरिकी सेना ने बेहद खतरनाक और कठिन मिशन को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि अबू-बिलाल अल-मिनुकी को लगता था कि वह अफ्रीका में छिपकर दुनिया की नजरों से बच जाएगा, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं।
कौन था अबू-बिलाल अल-मिनुकी?
अबू-बिलाल अल-मिनुकी का जन्म साल 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो इलाके में हुआ था। अमेरिका ने उसे साल 2023 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने वाले संगठन Counter Extremism Project के मुताबिक, साल 2018 में ISWAP प्रमुख मम्मन नूर की हत्या के बाद उसने संगठन की कमान अपने हाथ में ले ली थी।
बताया जाता है कि अल-मिनुकी बेहद शातिर रणनीतिकार था और ISIS के पश्चिम अफ्रीकी नेटवर्क का सबसे प्रभावशाली चेहरा बन चुका था। वह बोको हराम के खूंखार सरगना Abubakar Shekau का बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जाता था। दोनों के बीच कई बार रणनीति और आतंक फैलाने के तरीकों को लेकर टकराव भी हुआ था।
ISIS का ‘सीक्रेट नेटवर्क’ संभालता था अल-मिनुकी
अबू-बिलाल अल-मिनुकी ISIS के ‘अल-फुरकान ऑफिस’ का अहम सदस्य था। यह नेटवर्क नाइजीरिया समेत कई अफ्रीकी देशों में ISIS की गतिविधियों को ऑपरेट करता था। इसी नेटवर्क के जरिए आतंकियों को फंडिंग, हथियार और निर्देश दिए जाते थे। बताया जाता है कि ‘इस्लामिक स्टेट इन द ग्रेटर सहारा’ (ISGS) जैसे खतरनाक नेटवर्क भी इसी सिस्टम के जरिए संचालित होते थे।
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-मिनुकी कई बार अमेरिकी ऑपरेशन से बच निकला था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहता था और बेहद गुप्त तरीके से काम करता था। यही वजह थी कि CIA लंबे समय से उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
अब उसके मारे जाने को ISIS के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस ऑपरेशन के बाद अफ्रीका में ISIS नेटवर्क कमजोर पड़ सकता है, हालांकि आतंकवाद के खतरे को पूरी तरह खत्म मानना अभी जल्दबाजी होगी।












