झारखंड के 516 स्कूलों में अब भी छात्राओं के लिए शौचालय नहीं, 8 मार्च तक सुविधा देने का निर्देश

516 schools in Jharkhand still lack toilets for girl students; instructions issued to provide the facility by March 8.

झारखंड में संचालित 35,454 सरकारी स्कूलों में से सैकड़ों स्कूल आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 516 स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं है, जबकि 792 स्कूलों में लड़कों के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा 495 स्कूलों में पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जो शिक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

8 मार्च तक सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश

हेमंत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से पहले, यानी 8 मार्च तक सभी चिन्हित स्कूलों में शौचालय और पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह फैसला छात्राओं की शिक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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पीएम मोदी के निर्देश का हवाला

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन में सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय की 100% उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि 8 मार्च तक शौचालय निर्माण का काम पूरा कर लिया जाए।

ड्रॉपआउट की बड़ी वजह

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने सभी 24 जिलों के उपायुक्तों को स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शौचालय की कमी के कारण लड़कियों की अनुपस्थिति और ड्रॉपआउट की समस्या बढ़ती है। कई छात्राएं इसी वजह से पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं।

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अलग शौचालय पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी यौन हिंसा, मासिक धर्म स्वास्थ्य और ड्रॉपआउट जैसी समस्याओं को देखते हुए सभी स्कूलों में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। खासकर ग्रामीण इलाकों में शौचालयों के रखरखाव और साफ-सफाई की समस्या अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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