JPSC में मची उथल-पुथल! चेयरमैन एल. खियांग्ते का इस्तीफा, एग्जाम कंट्रोलर श्वेता हिरासत में, CID की कार्रवाई के बीच क्या फिर संकट में पड़ेंगी प्रतियोगी परीक्षाएं?
JPSC Chairman L. Khiangte Resigns: CID जांच और छापेमारी के बीच झारखंड लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया। जानिए इसका JPSC परीक्षाओं और अभ्यर्थियों पर क्या असर पड़ सकता है।

रांची। राज्य गठन के बाद से ही झारखंड लोक सेवा आयोग सवालों में रहा है। शुरुआती सालों में बेपटरी रहा आयोग, जैसे-तैसे फिर से पटरी पर आया था, लेकिन अब फिर से आयोग में उथल पुथल शुरू हो गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) एक बार फिर गंभीर विवादों के केंद्र में आ गया है। आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया है या सरकार ने उनसे इस्तीफा लिया है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। लेकिन सीआईडी की छापेमारी और आयोग में चल रही जांच के बीच यह घटनाक्रम कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। सवाल ये भी आ रहा है कि क्या आयोग फिर से उसी स्थिति में पहुंच जायेगा, जहां से वो निकलकर आया था।
CID की कार्रवाई के बाद तेज हुए घटनाक्रम
मंगलवार को सीआईडी और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने जेपीएससी से जुड़े मामलों में रांची समेत आधा दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी की। जांच एजेंसियां आयोग में कथित अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। इसी कार्रवाई के कुछ घंटे बाद चेयरमैन एल. खियांग्ते के इस्तीफे की खबर सामने आई।
इस्तीफा दिया या लिया गया? बना हुआ है सस्पेंस
सूत्रों के मुताबिक, जांच प्रभावित न हो, इसलिए अध्यक्ष ने पद छोड़ने का फैसला किया। वहीं राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि उनसे इस्तीफा लिया गया है। फिलहाल सरकार या राजभवन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इस्तीफे की परिस्थितियों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
श्वेता गुप्ता प्रकरण बना विवाद की बड़ी वजह
जेपीएससी में असिस्टेंट एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। सरकार ने मई 2026 में उनका तबादला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में कर दिया था और आयोग में नए अधिकारियों की नियुक्ति भी की थी। आरोप है कि इसके बावजूद आयोग ने न तो उन्हें कार्यमुक्त किया और न ही नए अधिकारियों को परीक्षा संबंधी जिम्मेदारियां सौंपीं।कार्मिक विभाग ने भी इस संबंध में आयोग को निर्देश जारी किए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ। अब सीआईडी की कार्रवाई के दौरान श्वेता गुप्ता से पूछताछ किए जाने की सूचना है।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का जिम्मा देने पर भी उठे सवाल
आयोग पहले से उस फैसले को लेकर विवादों में था, जिसमें प्रतियोगी परीक्षाओं का कार्य उत्तर प्रदेश की TDPL कंपनी को सौंपा गया था। आरोप है कि यह कंपनी पहले से ब्लैकलिस्टेड थी। इस निर्णय को लेकर लगातार शिकायतें होती रहीं और परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे।
अभ्यर्थियों की बढ़ सकती है चिंता
जेपीएससी में अचानक पैदा हुए इस संकट का सबसे बड़ा असर हजारों प्रतियोगी छात्रों पर पड़ सकता है। आयोग पहले भी नियुक्तियों और परीक्षाओं में देरी तथा विवादों के कारण सुर्खियों में रहा है। अब अध्यक्ष के इस्तीफे और जांच के बीच प्रस्तावित परीक्षाओं की समय-सीमा और आगे की प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बन सकती है।
एक बार फिर अस्थिरता के दौर में JPSC
झारखंड लोक सेवा आयोग का इतिहास विवादों और प्रशासनिक अस्थिरता से जुड़ा रहा है। बार-बार बदलते हालात, जांच और कानूनी विवादों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर असर डाला है। मौजूदा घटनाक्रम भी उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आयोग में नई व्यवस्था कितनी जल्दी बहाल करती है और लंबित तथा प्रस्तावित परीक्षाओं को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।








