झारखंड कांग्रेस में धमाकेदार बवाल…बिना आवेदन और इंटरव्यू के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति…कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश और पार्टी में मची खलबली

Jharkhand Congress erupts in uproar... District presidents appointed without application or interview... massive outrage among party workers and chaos within the party

जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर झारखंड कांग्रेस में घमासान मचा है. आरोप लगा है कि कई लोगों को बिना आवेदन लिए ही जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है. झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने 25 सांगठनिक जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की है. उनमें 10 जिलों में मौजूदा जिलाध्यक्षों को दोबारा मौका मिला है वहीं 15 जिलों में नये जिलाध्यक्ष बने हैं.

आरोप है कि संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के लिए पहले आवेदन लेना था. जिलाध्यक्ष के लिए आवेदन करने वाले प्रतिभागी का 5 साल तक संगठन में रहना जरूरी था और उनका इंटरव्यू तक किया जाना था लेकिन कई ऐसे लोगों को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जिन्होंने ना तो आवेदन दिया. न तो 5 साल संगठन में रहने की अहर्ता पूरी करते हैं और ना ही उन्होंने इंटरव्यू में हिस्सा लिया.

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जब कई जिलों से विरोध के स्वर उठे हैं तो प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष ने हस्तक्षेप किया और माना की गलती हुई है.

जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में विसंगति से बवाल
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में विसंगति का आरोप लगाकर कई जिलों से विरोध के स्वर तेज हुए तो प्रदेश नेतृत्व बीच-बचाव की मुद्रा में आ गया. प्रदेश प्रभारी के राजू ने कहा कि कांग्रेस में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कुछ नाराजगी है. पार्टी सभी जिलाध्यक्षों के काम का आकलन करेगी. इसके लिए जिलाध्यक्षों को 3 महीने का समय दिया जा रहा है. यदि पार्टी को लगेगा कि उनका काम संतोषजनक नहीं है तो पार्टी अपने निर्णय पर पुनर्विचार करेगी.

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वहीं प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि का3ंग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में कुछ त्रुटि हुई है. इसमें सुधार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जब नया प्रयोग होता है तो उसमें कुछ त्रुटि रह जाती है.

झारखंड कांग्रेस ने 2 विधायकों को बनाया जिलाध्यक्ष
गौरतलब है कि कांग्रेस ने झारखंड में पहली बार 2 विधायकों को जिलाध्यक्ष बनाया है. रामगढ़ में ममता देवी और सिमडेगा में भूषण बाड़ा को जिलाध्यक्ष बनाया गया है. पूर्व मंत्री जेपी पटेल को हजारीबाग का जिलाध्यक्ष बनाया गया है. दावा है कि जेपी पटेल ने जिलाध्यक्ष पद के लिए आवेदन तक नहीं किया था. जेपी पटेल किसी दूसरे व्यक्ति को जिलाध्यक्ष बनवाने की कवायद में लगे थे.

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देवघर, कोडरमा और चतरा में भी कार्यकर्ता नाराज
देवघर, कोडरमा और चतरा में भी जिलाध्यक्षों की नियुक्ति पर सवाल है. कहा जा रहा है कि ये लोग 5 साल तक संगठन में रहने की अनिवार्यता पूरी नहीं करते. धनबाद में जिलाध्यक्ष की नियुक्ति से नाराज कार्यकर्ताओं ने प्रदेश प्रभारी के राजू से शिकायत की है. अब प्रदेश नेतृत्व नाराज नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को मनाने में लगा है.

कहा तो यह भी जा रहा है कि जिलाध्यक्ष की नियुक्ति केंद्रीय नेतृत्व द्वारा की गई है और उसमें प्रदेश इकाई का कोई योगदान नहीं है. दूसरी ओर आश्वासन दिया जा रहा है कि जहां गलती रह गई है उसे ठीक किया जाएगा. गौरतलब है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गई थी जिलाध्यक्ष बनाने के लिए.

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