चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा सुरक्षा प्लान, मायावती-अखिलेश समेत 44 नेताओं को मिलेगी बुलेटप्रूफ जैकेट!
UP Election 2027: खुफिया इनपुट और सुरक्षा समीक्षा के बाद बड़ा फैसला, 11 मंत्रियों समेत कई बड़े नेताओं को सुरक्षा कवच देने की तैयारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार ने नेताओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा समीक्षा और खुफिया इनपुट के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव समेत 44 प्रमुख नेताओं को बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा मुख्यालय ने इसके लिए विशेष जैकेट खरीदने की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
सूत्रों के मुताबिक, इन विशेष बुलेटप्रूफ जैकेट्स की खरीद पर करीब 10 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। सुरक्षा व्यवस्था में शामिल नेताओं में Y और Z+ श्रेणी की सुरक्षा पाने वाले नेता, मंत्री और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख चेहरे शामिल हैं।
11 मंत्रियों को भी मिलेगा सुरक्षा कवच
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा जरूरतों और संभावित खतरे के आकलन के आधार पर योगी सरकार के 11 मंत्रियों को भी बुलेटप्रूफ जैकेट उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। इनमें संजय निषाद और नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
वहीं, विपक्ष और अन्य प्रमुख राजनीतिक चेहरों में पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और अखिलेश यादव के अलावा संगीत सोम और सुरेश राणा जैसे नेताओं को भी इस सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि ये विशेष जैकेट Y श्रेणी से लेकर Z+ सुरक्षा प्राप्त नेताओं और कुछ चुनिंदा विधायकों को दी जाएंगी।
चुनावी रैलियों से पहले क्यों बढ़ाई गई सुरक्षा?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनावी माहौल में नेताओं की जनसभाएं, रैलियां और रोड शो बढ़ने की संभावना है। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती भी बढ़ जाती है।
ऐसे में पुलिस और खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट तथा संभावित खतरों के आकलन के आधार पर एहतियाती कदम के तौर पर नेताओं की सुरक्षा मजबूत करने का फैसला लिया गया है।
सुरक्षा कारणों पर आधिकारिक जानकारी नहीं
हालांकि, सुरक्षा एजेंसियों के प्रोटोकॉल के तहत बुलेटप्रूफ जैकेट देने के तकनीकी और खुफिया कारणों को लेकर सरकार या सुरक्षा मुख्यालय की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर 44 नेताओं के लिए एक साथ सुरक्षा कवच की जरूरत क्यों महसूस हुई? सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट और आने वाले चुनावी माहौल के बीच इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है।












