95 हार का सच…राहुल गांधी की कांग्रेस को क्यों मिल रही है लगातार शिकस्त? जाने कांग्रेस की हार के कारण

The truth behind the 95 defeats... Why is Rahul Gandhi's Congress facing continuous defeats? Learn the reasons behind Congress's defeats.

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म है। कांग्रेस जहां लगातार ‘वोटचोरी’ के आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष दावा कर रहा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी 95 चुनाव हार चुकी है। ऐसे दावों को समझने से पहले राहुल गांधी चुनाव प्रदर्शन और उनकी राजनीतिक यात्रा को जानना जरूरी है।

राहुल गांधी ने 2004 में अमेठी से राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 2007 में वे कांग्रेस के महासचिव बने और यूथ कांग्रेस व एनएसयूआई की जिम्मेदारी संभाली। 2013 में उपाध्यक्ष बने और 2014 में कांग्रेस के अनौपचारिक प्रधानमंत्री चेहरे के रूप में चुनाव लड़े। 2017 में पार्टी अध्यक्ष बने, लेकिन 2019 की हार के बाद पद छोड़ दिया। 2024 में वे लोकसभा में नेता विपक्ष बने।

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राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राहुल गांधी की पहली रणनीतिक सफलता 2009 में दिखी, जब कांग्रेस ने यूपी में 21 सीटें जीतीं। हालांकि 2014 से शुरू हुई चुनौतियां लगातार बढ़ती रहीं। भ्रष्टाचार के आरोप, वंशवाद की आलोचना और आंतरिक गुटबाजी ने कांग्रेस की स्थिति कमजोर कर दी। इसके बावजूद राहुल गांधी लगातार बीजेपी और मोदी सरकार पर हमला बोलते रहे।

2014, 2019 और 2024—तीनों लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने विभिन्न राज्यों में मिलाजुला प्रदर्शन किया। कई जगह गठबंधन के सहारे सरकार बनी, लेकिन कई राज्यों में कांग्रेस चौथे स्थान पर रही।

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2019 के बाद राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ ने कांग्रेस के लिए नया राजनीतिक माहौल बनाया। कर्नाटक, हिमाचल और तेलंगाना में पार्टी को विजय मिली और 2024 लोकसभा में सीटें बढ़कर 99 हो गईं।

कुल मिलाकर, राहुल गांधी के दौर में कांग्रेस ने 77 बड़े चुनाव लड़े, जिनमें से 63 में हार मिली—यानी लगभग 80%। यही आँकड़े आज राहुल गांधी चुनाव प्रदर्शन पर जारी राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं।

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