तुगलकी फरमान जारी करने वाले सदर अस्पताल के उपाधीक्षक ने 1 माह में दिया इस्तीफा

धनबाद जिले के सदर अस्पताल के उपाधीक्षक के पद से डा संजीव कुमार ने 1 महीने के भीतर ही अपना इस्तीफा सौंप दिया। आपको बता दे की जब से डा संजीव कुमार को उपाधीक्षक की जिम्मेवारी दी गई थी तब से चर्चा में थे। सिविल सर्जन डा आलोक विश्वकर्मा ने पत्र जारी कर डा संजीव कुमार कार्यकारी उपाधीक्षक बनाया था। परंतु पदभार ग्रहण करने के साथ ही डा कुमार विवादों में थे।
पदभार ग्रहण के साथ ही जारी किया था तुगलकी फरमान
पूर्व से ही डा संजीव कुमार अपने गुस्सैल मिजाज के लिए जाने जाते है। कर्मियों और पदाधिकारियों को चेतावनी और धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल आम थी। सदर अस्पताल में कार्यरत कर्मी और पदाधिकारी के ड्यूटी रोस्टर 12-12 घंटे की बना दी गई जिससे पहले चिकित्सक ने इसका विरोध किया जिसके बाद चिकित्सक के ड्यूटी रोस्टर को वापस कर लिया गया।उसके 2 दिन बाद कर्मियों ने इस ड्यूटी रोस्टर का विरोध गया। भारी विरोध और विभाग की किरकिरी के बाद इस ड्यूटी रोस्टर को भी वापस लेना पड़ा। इस आदेश के बाद विभाग की खूब फजीहत हुई।
श्रम कानून का बन सकता था मामला
आपको बता दे की श्रम कानून के तहत किसी भी निबंधित सरकारी, गैर सरकारी में कार्यरत कर्मियों से अधिकतम 8 घंटे कार्य लिया जा सकता है परंतु 12 घंटे की ड्यूटी रोस्टर बनाने से श्रम कानून के उलंघन का में बन सकता था।जिसके बाद विभाग की फजीहत और तय थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार काफी दिनों से डा संजीव कुमार जिले के प्रतिरक्षण का कार्य की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं बावजूद इसके धनबाद जिला अन्य जिलों से प्रतिरक्षण के मामले में काफी पीछे है। धनबाद को प्रतिरक्षण के मामले में काफी कम उपलब्धि दिलाने वाले चिकित्सक को सदर अस्पताल के कार्यकारी उपाधीक्षक का पदभार सौंपना भी अपने आप सवालों के घेरे में था।











