झारखंड : हजारीबाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अड़चन का बड़ा मामला…ACB गिरफ्तारी के बाद भी निलंबन पर सवाल

Jharkhand: Major Case of Corruption and Administrative Obstruction in Hazaribagh—Questions Raised Over Suspension Even After ACB Arrest

झारखंड का हजारीबाग जिला इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कभी कोषागार वेतन घोटाला, तो कभी बरही बैंक डकैती जैसे मामलों के बाद अब एक नया भ्रष्टाचार से जुड़ा प्रकरण सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो को 9 अप्रैल 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें हजारीबाग के जेपी कारा भेज दिया गया, जहां वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद हैं।

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एक महीने बाद भी निलंबन नहीं, विभागीय चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तारी के करीब एक महीना बीत जाने के बाद भी विभाग ने अभी तक उन्हें निलंबित नहीं किया है। इस देरी को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चाओं का माहौल गर्म है और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

दो प्रभार, पूरा सिस्टम ठप, 80 से ज्यादा कर्मचारियों का वेतन अटका
राहुल कुमार मालतो जलपथ प्रमंडल संख्या 2 हजारीबाग के साथ साथ बरही प्रमंडल के भी प्रभारी कार्यपालक अभियंता थे। नियम के अनुसार वे डीडीओ यानी निकासी और व्यय पदाधिकारी भी थे, जो वेतन भुगतान की जिम्मेदारी संभालते हैं।
उनके जेल में होने और निलंबन न होने की वजह से दोनों कार्यालयों के 80 से अधिक कर्मचारियों का वेतन अटक गया है, जिससे पूरा वित्तीय सिस्टम ठप पड़ गया है।

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1.75 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी, निर्माण कार्य से जुड़ा मामला
ACB ने उन्हें 1.75 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई बरही क्षेत्र में एक निर्माण योजना से जुड़े मामले में की गई थी, जहां शिकायत के आधार पर जाल बिछाकर उन्हें पकड़ा गया। इस मामले में एक सहायक अभियंता की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है।

कर्मचारियों में नाराजगी, वेतन संकट को लेकर आंदोलन की चेतावनी
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश संरक्षक सतीश कुमार सिंहा ने विभाग से तुरंत कार्रवाई और वेतन भुगतान की मांग की है। उनका कहना है कि जब अधिकारी जेल में हैं, तो उन्हें तुरंत निलंबित कर वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए।

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प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ा असंतोष, आगे आंदोलन के संकेत
वेतन न मिलने से कर्मचारी अब खुलकर नाराजगी जता रहे हैं और आंदोलन की तैयारी में हैं। वहीं विभागीय स्तर पर अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, क्योंकि मुख्य अभियंता विजय कुमार भगत से संपर्क नहीं हो सका।

हजारीबाग में लगातार विवाद, प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरे सवाल
लगातार सामने आ रहे मामलों ने हजारीबाग की प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, तो दूसरी ओर निर्णय में देरी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

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