केसर के बाद सबसे महंगा मसाला! 3 साल का इंतजार और फिर लाखों नहीं, करोड़ों की कमाई; जानिए वनीला खेती का पूरा गणित
एक ऐसी फसल जिसकी कीमत सुनकर चौंक जाएंगे किसान, अब दक्षिण भारत ही नहीं उत्तर भारत में भी बढ़ रहा क्रेज

नई दिल्ली। खेती में पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ नया करने की सोच रहे किसानों के लिए वनीला की खेती सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। दुनिया के सबसे महंगे मसाले केसर के बाद वनीला को दूसरा सबसे महंगा मसाला माना जाता है। इसकी मांग देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि अब किसान इसे भविष्य की सबसे लाभदायक फसलों में गिनने लगे हैं।
वनीला की खेती शुरू करने से पहले इसके लिए उपयुक्त जलवायु, तापमान और मिट्टी की जानकारी होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार वनीला के पौधों के लिए 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे उपयुक्त माना जाता है। वहीं जैविक तत्वों से भरपूर भुरभुरी और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी इसकी बेहतर वृद्धि में मदद करती है।
बीज नहीं, कटिंग से होती है ज्यादा सफल खेती
वनीला एक बेलदार पौधा है, जिसे बीज और कटिंग दोनों तरीकों से लगाया जा सकता है। हालांकि अधिकांश किसान कटिंग के माध्यम से इसकी खेती करना पसंद करते हैं, क्योंकि इससे पौधे जल्दी विकसित होते हैं। बेल के रूप में बढ़ने वाले इस पौधे को सहारा देने के लिए विशेष पोल या संरचना की आवश्यकता होती है।
छोटी सी गलती बिगाड़ सकती है पूरा उत्पादन
विशेषज्ञ बताते हैं कि वनीला की अच्छी पैदावार के लिए बेलों का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। बेल की लंबाई लगभग 150 सेंटीमीटर तक नियंत्रित रखने की सलाह दी जाती है। साथ ही समय-समय पर वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद देने से पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन बढ़ता है।
3 साल का इंतजार, फिर शुरू होती है कमाई
वनीला की खेती में धैर्य सबसे बड़ा निवेश माना जाता है। पौधों की रोपाई के बाद फसल को पूरी तरह तैयार होने में करीब तीन साल का समय लग सकता है। बेलों पर 9 से 10 महीने के भीतर फूल आने लगते हैं, जो बाद में फलियों में बदल जाते हैं। पकने के बाद इन फलियों को सावधानीपूर्वक तोड़कर प्रोसेस किया जाता है, जिसके बाद बाजार में इनकी ऊंची कीमत मिलती है।
50 हजार रुपए किलो तक बिकती है वनीला
वनीला की सूखी फलियां बाजार में 40 हजार से 50 हजार रुपए प्रति किलोग्राम तक बिक सकती हैं। यही वजह है कि इसकी खेती को किसानों के लिए हाई-वैल्यू क्रॉप माना जाता है। अच्छी देखभाल और सही मार्केटिंग के जरिए किसान इससे शानदार आय अर्जित कर सकते हैं।
अब उत्तर भारत में भी बढ़ रहा रुझान
अब तक वनीला की खेती मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिण भारतीय राज्यों में होती थी, लेकिन आधुनिक शेड हाउस तकनीक की मदद से उत्तर भारत के किसान भी इसका सफल उत्पादन करने लगे हैं। इसके अलावा सरकार भी औषधीय और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सहायता और सब्सिडी उपलब्ध करा रही है।
वनीला की खेती भले ही धैर्य और तकनीकी जानकारी मांगती हो, लेकिन एक बार सफल होने पर यह किसानों के लिए आमदनी के नए दरवाजे खोल सकती है। यही कारण है कि इसे भविष्य की सबसे लाभदायक खेती में से एक माना जा रहा है।












