जानिए कौन हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 नए जज? सबसे ज्यादा चर्चा उस नाम की… जिसने रच दिया इतिहास

चार मुख्य न्यायाधीश और एक वरिष्ठ महिला वकील को मिली सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी, न्यायपालिका में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत में सोमवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के लिए पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। इन नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम Court में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है। माना जा रहा है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, लेकिन इन पांच नामों में एक ऐसा नाम भी शामिल है जिसने पूरे कानूनी जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पिछले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में इन नामों की सिफारिश की थी, जिसे अब केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है।

ये हैं सुप्रीम कोर्ट के 5 नए न्यायाधीश

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किए गए नए न्यायाधीशों में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव सचदेवा, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण पल्ली और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं।

जस्टिस शील नागू: पर्यावरण और निजता के मामलों में रहे चर्चित

1 जनवरी 1965 को जन्मे जस्टिस शील नागू ने 1987 में वकालत शुरू की थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपने न्यायिक सफर की शुरुआत करने वाले नागू ने सिविल, संवैधानिक और सेवा संबंधी मामलों में विशेष पहचान बनाई। पर्यावरण संरक्षण, निजता के अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों के कारण वह सुर्खियों में रहे। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2029 तक रहेगा।

जस्टिस श्री चंद्रशेखर: कई हाई-प्रोफाइल मामलों की कर चुके हैं सुनवाई

रांची में जन्मे जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और 1993 में वकालत शुरू की। उन्होंने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़, मालेगांव विस्फोट और मुंबई की महत्वपूर्ण कोस्टल रोड परियोजना से जुड़े मामलों की सुनवाई की है। उनकी नियुक्ति झारखंड के लिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में राज्य का कोई प्रतिनिधित्व नहीं था। वह मई 2030 में सेवानिवृत्त होंगे।

जस्टिस संजीव सचदेवा: दिल्ली से मध्य प्रदेश तक का लंबा न्यायिक सफर

26 दिसंबर 1964 को जन्मे जस्टिस संजीव सचदेवा ने दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और दिल्ली हाईकोर्ट से न्यायिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थायी वकील के रूप में भी सेवाएं दीं। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल लगभग साढ़े तीन वर्ष का रहेगा।

जस्टिस अरुण पल्ली: प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव का अनोखा संगम

पटियाला में जन्मे जस्टिस अरुण पल्ली ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में लंबा समय बिताया। वह पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रह चुके हैं। दिसंबर 2013 में हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने और बाद में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुए। सुप्रीम कोर्ट में उनका कार्यकाल तीन वर्ष से कुछ अधिक रहेगा।

सबसे ज्यादा चर्चा वी. मोहना की, जिन्होंने रच दिया इतिहास

इन नियुक्तियों में सबसे चर्चित नाम वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना का है। वह देश के न्यायिक इतिहास में दूसरी ऐसी महिला हैं जिन्हें सीधे वकालत से सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इससे पहले यह उपलब्धि जस्टिस इंदु मल्होत्रा के नाम थी।

वी. मोहना अब सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला जज बन गई हैं। वर्तमान में जस्टिस बीवी नागरत्ना के बाद वह सुप्रीम कोर्ट की दूसरी महिला न्यायाधीश होंगी। कोयंबटूर में जन्मी मोहना ने 1996 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के रूप में पंजीकरण कराया था और 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला।

महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार और कर्नाटक हिजाब विवाद जैसे चर्चित मामलों में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उनका कार्यकाल जून 2031 तक रहेगा।

न्यायपालिका में नए दौर की शुरुआत

सुप्रीम कोर्ट में इन पांच नई नियुक्तियों को न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर वी. मोहना की नियुक्ति को महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और न्यायिक व्यवस्था में प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में ये पांचों न्यायाधीश देश के कई बड़े और संवेदनशील मामलों में अहम भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं।

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