झारखंड के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! BAU में शुरू हुई हाईटेक लैब, अब बदलेंगे खेती के तरीके और फसलों की किस्मत

रांची। झारखंड में कृषि अनुसंधान को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) ने अत्याधुनिक प्लांट ब्रीडिंग मॉलेक्यूलर प्रयोगशाला की शुरुआत की है। यह हाईटेक लैब जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और आधुनिक खेती की चुनौतियों से निपटने के लिए नई और बेहतर फसल किस्मों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
गुरुवार को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.सी. दुबे ने इस आधुनिक प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि पारंपरिक पादप प्रजनन को मॉलेक्यूलर विज्ञान से जोड़कर अनुसंधान और नवाचार के नए रास्ते खुलेंगे, जिसका सीधा लाभ किसानों, कृषि उद्योग और समाज को मिलेगा।
नई प्रयोगशाला डीएनए निष्कर्षण, मार्कर-असिस्टेड चयन, जीनोटाइपिंग और मॉलेक्यूलर डायग्नोस्टिक्स जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। इन तकनीकों की मदद से शोधकर्ता और पीजी-पीएचडी के छात्र ऐसी फसल किस्मों पर काम करेंगे, जो अधिक उत्पादन देने वाली, बेहतर पोषण वाली, कीट एवं रोग प्रतिरोधी और सूखा व प्रतिकूल जलवायु को सहन करने में सक्षम हों।
कुलपति ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों से नई तकनीकों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल आनुवंशिकी विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य विषयों के शिक्षक भी मॉलेक्यूलर रिसर्च से जुड़ें, ताकि बहु-विषयक अनुसंधान को बढ़ावा मिल सके।
विश्वविद्यालय के अनुसार, प्रयोगशाला पूरी तरह से संचालित हो चुकी है और इसमें पीजी एवं पीएचडी छात्रों के शोध कार्य भी शुरू हो गए हैं। यह लैब क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करेगी तथा सरकारी एजेंसियों, कृषि अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर जलवायु-अनुकूल फसल प्रौद्योगिकियों के विकास और प्रसार में योगदान देगी। इसका संचालन आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग की अध्यक्ष डॉ. मणिगोपा चक्रवर्ती के मार्गदर्शन में किया जाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हाईटेक लैब में उपलब्ध आधुनिक उपकरणों की मदद से रोग एवं कीट प्रतिरोधी, सूखा सहनशील, अधिक उपज देने वाली और बेहतर पोषण मूल्य वाली फसलों के विकास की प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज होगी। साथ ही लाभकारी जीनों की शीघ्र पहचान होने से अनुसंधान की लागत और समय दोनों में कमी आएगी, जिससे टिकाऊ कृषि और भविष्य की खाद्य सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
उद्घाटन समारोह में निदेशक अनुसंधान डॉ. पी.के. सिंह, कृषि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. डी.के. शाही सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और शोधकर्ता मौजूद रहे।









