घर खरीदने से पहले ये 7 कागज नहीं देखे तो फंस सकता है पैसा! एक गलती और शुरू हो सकता है कानूनी विवाद

नई दिल्ली: घर खरीदना जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला होता है। लेकिन घर की लोकेशन, डिजाइन और सुविधाएं देखने के साथ उससे जुड़े कानूनी दस्तावेजों की जांच करना भी बेहद जरूरी है। प्रॉपर्टी के कागजों में छोटी सी कमी आगे चलकर स्वामित्व विवाद, कर्ज की देनदारी या कानूनी कार्रवाई जैसी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।

अगर आप घर या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं तो पेमेंट करने से पहले इन 7 जरूरी दस्तावेजों को जरूर वेरिफाई करें।

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1. Sale Deed और Title Deed की जांच

Sale Deed वह प्रमुख रजिस्टर्ड दस्तावेज है, जिसके जरिए संपत्ति का स्वामित्व विक्रेता से खरीदार को ट्रांसफर होता है। वहीं Title Deed किसी एक दस्तावेज का नाम नहीं, बल्कि संपत्ति के मालिकाना हक की पूरी चेन को दर्शाने वाली अवधारणा है।

पुराने Sale Deed, Gift Deed, Partition Deed जैसे दस्तावेजों के जरिए कम से कम 30 साल की टाइटल चेन की जांच करना जरूरी बताया गया है। साथ ही Index II के जरिए रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन की जानकारी भी क्रॉस-चेक की जा सकती है।

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2. Encumbrance Certificate यानी EC

प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह पता करना जरूरी है कि उस पर कोई लोन, मॉर्गेज, बैंक लियन या अन्य रजिस्टर्ड कानूनी देनदारी तो नहीं है। इसके लिए Encumbrance Certificate (EC) की जांच की जाती है।

EC में तय अवधि के दौरान संपत्ति से जुड़े रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलती है। अगर संबंधित अवधि में कोई रजिस्टर्ड देनदारी नहीं मिलती, तो Nil Encumbrance Certificate जारी किया जा सकता है।

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3. Property Card और Mutation Certificate

शहरी संपत्ति के मामले में Property Card काफी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। इससे प्लॉट नंबर, जमीन का क्षेत्रफल और दर्ज मालिकाना हक जैसी जानकारी को वेरिफाई किया जा सकता है।

वहीं Mutation Certificate यानी दाखिल-खारिज या फेरफार एंट्री सरकारी रेवेन्यू रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराने से जुड़ी होती है। इससे प्रॉपर्टी टैक्स संबंधी रिकॉर्ड भी अपडेट होता है।

4. Completion Certificate और Occupancy Certificate

अगर आप किसी बिल्डिंग या मल्टी-स्टोरी प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीद रहे हैं तो Completion Certificate (CC) और Occupancy Certificate (OC) जरूर चेक करें।

CC यह प्रमाणित करता है कि निर्माण स्वीकृत प्लान और संबंधित नियमों के अनुसार पूरा हुआ है। वहीं OC यह पुष्टि करता है कि बिल्डिंग रहने के लिए उपयुक्त है और जरूरी यूटिलिटी कनेक्शन उपलब्ध हैं।

5. Approved Building Plan

घर या फ्लैट खरीदने से पहले यह भी देखना जरूरी है कि बिल्डिंग का Approved Building Plan मौजूद है या नहीं।

बिल्डिंग प्लान में लेआउट, FSI, फायर सेफ्टी और अन्य निर्माण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। इसके साथ संबंधित Commencement Certificate और जरूरी अनुमोदनों की भी जांच करनी चाहिए।

6. Conveyance Deed

हाउसिंग सोसाइटी या गेटेड कम्युनिटी में Conveyance Deed भी अहम दस्तावेज है। इसके जरिए जमीन और कॉमन एरिया का मालिकाना हक बिल्डर से हाउसिंग सोसाइटी को ट्रांसफर किया जाता है।

7. Digital Land Records और RERA Details

जमीन या प्लॉट से जुड़ी संपत्ति खरीदते समय राज्य के आधिकारिक डिजिटल लैंड रिकॉर्ड भी जरूर चेक करें। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में Digital 7/12 Extract से सर्वे नंबर, मालिकाना हक, जमीन का प्रकार और अन्य जानकारी देखी जा सकती है।

इसके अलावा अगर आप किसी नए प्रोजेक्ट में घर या फ्लैट खरीद रहे हैं तो उसका RERA Registration भी जरूर चेक करें और संबंधित राज्य के RERA पोर्टल पर लंबित शिकायतों की जानकारी देखें।

पेमेंट करने से पहले ये चेकलिस्ट जरूर देखें

घर खरीदने से पहले इन चीजों को क्रॉस-चेक करना आपके लिए बेहद जरूरी है:

  • कम से कम 30 साल की Title Chain
  • 15-30 साल का Encumbrance Certificate
  • Approved Building Plan और Commencement Certificate
  • Completion Certificate और Occupancy Certificate
  • Property Card/7/12 Extract
  • Latest Property Tax Receipts
  • RERA Registration और शिकायतों की जानकारी
  • Independent Property Lawyer से Legal Title Opinion

 

सबसे जरूरी बात

प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल विक्रेता या बिल्डर की ओर से दिए गए कागजों पर निर्भर न रहें। दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराना ज्यादा सुरक्षित है। स्रोत सामग्री के मुताबिक, Sub-Registrar Office में फिजिकल सर्च और स्वतंत्र प्रॉपर्टी एडवोकेट की राय लेना भी उपयोगी है। साथ ही कैश ट्रांजैक्शन से बचने और आधिकारिक सरकारी पोर्टल से रिकॉर्ड क्रॉस-वेरिफाई करने की सलाह दी गई है।

याद रखें—घर की कीमत लाखों-करोड़ों में हो सकती है, लेकिन कागजों की एक छोटी गलती आपकी पूरी जमा-पूंजी को कानूनी पचड़े में फंसा सकती है।

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