धनिया की एक छोटी सी गड्डी ने बिगाड़ा रसोई का बजट! ₹230 किलो तक पहुंचा भाव, अदरक-लहसुन भी हुए महंगे
बारिश ने बिगाड़ी सप्लाई चेन तो रोजमर्रा की रसोई पर पड़ा असर, अदरक की महंगाई 83% के पार; दाल-चावल की कीमतों पर भी बढ़ी नजर

नई दिल्ली, 15 अगस्त 2026: सब्जी की प्लेट को स्वाद और खुशबू देने वाली धनिया अब आम लोगों की जेब पर भारी पड़ने लगी है। जिस धनिया को अक्सर सब्जी खरीदते समय मुफ्त में गड्डी के रूप में दिया जाता था, उसकी कीमत अब कई बाजारों में 220 से 230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं, इसका थोक भाव करीब 175 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।
धनिया की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे भारी बारिश और सप्लाई चेन में आई रुकावट को बड़ी वजह माना जा रहा है। धनिया जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए खेत से मंडी और फिर बाजार तक पहुंचने में थोड़ी भी बाधा इसकी कीमतों पर तुरंत असर डालती है।
अदरक की महंगाई 83% के पार
धनिया अकेला ऐसा मसाला नहीं है जिसकी कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ा है। रोजाना इस्तेमाल होने वाली अदरक, लहसुन और प्याज भी पिछले साल की तुलना में महंगे हुए हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में अदरक की महंगाई दर 83.62% पहुंच गई, जबकि जून में यह 50.41% थी। इसी तरह लहसुन की महंगाई दर 17.93% से बढ़कर 35.36% और प्याज की महंगाई दर 4.73% से बढ़कर 22.54% हो गई।
यानी खाने में थोड़ी मात्रा में इस्तेमाल होने वाली इन चीजों की बढ़ती कीमत का असर भी अब घरेलू बजट पर साफ दिखाई देने लगा है।
आलू-टमाटर सस्ते, फिर भी रसोई का खर्च बढ़ा
हालांकि सब्जियों की सभी कीमतों में तेजी नहीं आई है। आलू की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 16.56% नीचे हैं। टमाटर और मटर भी अपेक्षाकृत सस्ते हुए हैं।
ऐसे में खाद्य महंगाई का दबाव इस बार पारंपरिक आलू-प्याज-टमाटर की बजाय रोजाना खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।
जुलाई में खाद्य महंगाई भी बढ़ी
भारत में खाद्य महंगाई दर जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गई। धनिया और अन्य हरी सब्जियों की कीमतों में तेजी के पीछे बारिश से प्रभावित सप्लाई को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
नासिक से धनिया की आवक प्रभावित होने के बाद थोक बाजारों में इसके भाव में तेजी देखी गई। चूंकि धनिया जल्दी खराब होता है, इसलिए इसकी आपूर्ति में थोड़ी सी भी रुकावट खुदरा कीमतों को तेजी से प्रभावित कर सकती है।
कभी सूखा, कभी तेज बारिश… मौसम ने बढ़ाई मुश्किल
इस साल मॉनसून का पैटर्न भी असमान रहा है। जून में देश में बारिश सामान्य से 39.8% कम रही, जबकि जुलाई में कई इलाकों में अचानक भारी बारिश हुई। इसके बाद कुछ क्षेत्रों में फिर बारिश की कमी देखने को मिली।
मौसम के इस उतार-चढ़ाव का सबसे पहला असर जल्दी खराब होने वाली फसलों पर पड़ता है। लंबे समय तक बारिश की कमी और उसके बाद अचानक भारी बारिश से खेतों में उत्पादन, मंडियों तक आवक और परिवहन—तीनों प्रभावित हो सकते हैं।
भारत की करीब आधी कृषि भूमि अब भी सिंचाई के लिए मॉनसून पर निर्भर है। ऐसे में बारिश के असमान वितरण से सब्जियों के अलावा दालों और अनाज की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
मॉनसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो की स्थिति को लेकर भी मौसम विशेषज्ञों और अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों की चिंता बढ़ी है। अल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव से लंबे समय तक सूखे और फिर कम समय में अत्यधिक बारिश जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक भी असमान मॉनसून को खाद्य महंगाई के लिए जोखिम मान चुका है। खाद्य पदार्थों की CPI बास्केट में करीब आधी हिस्सेदारी है, इसलिए बारिश में गड़बड़ी का सीधा असर महंगाई और आम परिवार के बजट पर पड़ सकता है।
दालों की बुवाई में भी कमी
मॉनसून की अनिश्चितता का असर दालों की खेती पर भी दिखाई दे रहा है। 17 जुलाई तक दालों की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 15% कम था।
जून में मध्य भारत में कम बारिश और मॉनसून की देरी को इसके प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। अगर मौसम की स्थिति आगे भी चुनौतीपूर्ण रहती है, तो आने वाले समय में दालों की कीमतों पर भी नजर रखना जरूरी होगा।
चावल भी हुआ महंगा
रसोई के एक और जरूरी सामान चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत मई में 42.92 रुपये प्रति किलो से बढ़कर जुलाई में 44.35 रुपये प्रति किलो हो गई। यानी इस दौरान करीब 3.33% की बढ़ोतरी हुई।
छोटी चीजों की बड़ी मार!
धनिया की कीमत में आया उछाल भले ही अकेले देखने पर मामूली लगे, लेकिन अदरक, लहसुन, प्याज, चावल और दूसरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से इसका असर पूरे घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि मॉनसून का अगला दौर सप्लाई और उत्पादन के लिए राहत लेकर आता है या रसोई की महंगाई की यह चुभन आने वाले दिनों में और बढ़ती है।












