कोल कंपनी अपने उत्पादन क्षेत्र का नहीं कर पा रही विस्तार…400 परिवार का विस्थापन बनी समस्या

रांची राज्य में भूमि अधिग्रहण एक बड़ी समस्या है। जिस कारण बड़े बड़े प्रोजेक्ट आधार में लटक गए हैं। ऐसी समस्या कोयले के क्षेत्र में भी हो रही है। जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाने से बीसीसीएल, ईसीएल, सीसीएल जैसी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। धनबाद क्षेत्र में बीसीसीएल और ईसीएल की खदानें है। राजपुरा एरिया और कपासरा माइंस में ईसीएल प्रबंधन खदान का विस्तार नहीं कर पा रही है। मालूम हो कि राजपुरा और कपासारा दोनों धनबाद के निरसा क्षेत्र के मुग्मा में आते हैं। इसका समस्या का समाधान प्रबंधन की ओर से राज्य खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन से मदद मांगी गई है। परंतु काफी कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिल पायी है।
सबसे बड़ी समस्या विस्थापन
दोनों माइंस क्षेत्र के विस्तार के लिए ईसीएल प्रबंधन को लगभग 400 परिवारों को विस्थापित करना होगा। राजपुरा माइंस के विस्तार के लिए कालामाटी और कापासारा का विस्तार बिहार बॉर्डर तक होना है। ऐसे में कपासारा का क्षेत्र बिहार सरकार के अधीन है। दोनों क्षेत्रों का विस्तार के लिए गांव को विस्थापित किया जाना है। इसीलिए प्रबंधन से क्षेत्रों के स्थानीय निवासी जमीन के बदले नियोजन और आवास की मांग कर रहे हैं। लंबे समय से यह मांग पूरा नहीं हो पा रही है। ऐसे में विस्थापन एक बड़ी समस्या हो गई है। खनन का विस्तार नहीं हो पाने से उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप कोयला नहीं निकाला जा पा रहा है। जिससे 2 खदानों का नुकसान झेलना पड़ रहा है ।
प्रबंधन के स्तर से नही मिल रही सफलता
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीएल प्रबंधन कुछ समय पहले राजपुरा माइंस के विस्तार का प्रयास किया था। इसके लिए स्थानीय निवासियों को कालीमाटी से विस्थापित कदमा में रहने के लिए आवास उपलब्ध किया। लेकिन स्थानीय निवासी ने इसे इंकार कर दिया। स्थानीय लोगों ने प्रबंधन द्वारा दिए गए आवाज को रहने लायक नहीं बताते हुए अपना आवास नहीं बदला। इसके बाद प्रबंधन की समस्या और बढ़ गई और खदान का विस्तार नहीं हो पाया। अब प्रबंधन सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है।











