लोकसभा में अमित शाह का बड़ा बयान, जाति जनगणना से लेकर परिसीमन तक की दिशा हुई स्पष्ट
संसद में जनगणना और सामाजिक न्याय पर केंद्र सरकार का अहम संदेश

नई दिल्ली में संसद के विशेष सत्र के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की भविष्य की राजनीति और सामाजिक न्याय की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनगणना की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है और इसे आधुनिक डिजिटल प्रणाली के तहत पूरा किया जाएगा।
जाति आधारित गणना को मिलेगा प्रमुख स्थान
अमित शाह ने सदन में कहा कि इस बार की जनगणना में नागरिकों की जानकारी के साथ जाति आधारित गणना को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आगामी परिसीमन और आरक्षण से जुड़े नए ढांचे के लिए आधार तैयार करेगा, जिससे नीतिगत फैसलों में पारदर्शिता आएगी।
विपक्ष के सवालों पर सरकार का जवाब
सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया उनके विभाग के अंतर्गत आती है और इसे तय प्रक्रिया के अनुसार ही आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुरुआती चरण में घरों की सूची तैयार की जा रही है, जिसमें किसी प्रकार का भ्रम पैदा नहीं होना चाहिए।
धर्म आधारित आरक्षण पर कड़ा रुख
धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर अमित शाह ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत धर्म आधारित आरक्षण की अनुमति नहीं है। सरकार का उद्देश्य वंचित और पिछड़े वर्गों को न्याय दिलाना है, लेकिन धार्मिक आधार पर आरक्षण संभव नहीं है।
डिजिटल और पारदर्शी जनगणना की ओर कदम
गृह मंत्री ने बताया कि 2011 के बाद पहली बार हो रही यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। इसके लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सटीक बनेगी।
परिसीमन और आरक्षण ढांचे पर पड़ेगा प्रभाव
अमित शाह के अनुसार आगामी परिसीमन प्रक्रिया नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर होगी। इससे अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सीटों के पुनर्निर्धारण सहित राजनीतिक प्रतिनिधित्व में भी बदलाव संभव है।












