Anil Tiger Murder Case: मुख्य आरोपी जिशान अख्तर की जमानत याचिका खारिज, रहना होगा अभी जेल में…

रांची कोर्ट ने भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड के आरोपी जिशान अख्तर की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने CDR, गवाहों के बयान और केस डायरी के आधार पर राहत देने से इनकार किया।

रांची। सरेआम भाजपा नेता नेता के सर पर गोली मारने वाले को नहीं मिली जमानत, अनिल टाइगर हत्याकांड के मुख्य आरोपी जिशान अख्तर को रहना होगा अभी जेल में
रांची। सरेआम भाजपा नेता के सर में गोली मारने वाले आरोपी को अभी जेल में ही रहना होगा। भाजपा नेता अनिल टाइगर (अनिल महतो) हत्याकांड के मुख्य आरोपी जिशान अख्तर को कोर्ट ने राहत नहीं दी है। रांची की अपर न्यायायुक्त संजीव झा की अदालत ने सुनवाई के बाद उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जिशान अख्तर 10 अप्रैल 2025 से न्यायिक हिरासत में है।

अभियोजन ने किया जमानत का विरोध

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी हत्या की साजिश रचने और घटना को अंजाम देने में शामिल था तथा उसके खिलाफ गंभीर और प्रत्यक्ष साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत के समक्ष प्रस्तुत केस डायरी के अनुसार मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह स्पष्ट हुआ कि जिशान अख्तर लगातार उन सह-आरोपियों के संपर्क में था, जिन्होंने भाजपा नेता अनिल टाइगर पर गोली चलाई थी।

स्वीकारोक्ति बयान और गवाहों का भी हवाला

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी के अनुसार आरोपी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में भी घटना में संलिप्तता स्वीकार की है। इसके अलावा, शिकायतकर्ता समेत कई गवाहों ने अपने बयान में अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन किया है। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

क्या है अनिल टाइगर हत्याकांड?

भाजपा नेता अनिल टाइगर की पिछले वर्ष मार्च महीने में रांची के कांके थाना क्षेत्र स्थित एक होटल के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे राज्य में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी थी।जांच के दौरान सामने आया कि कांके थाना क्षेत्र के चामगुरु में लगभग 10 एकड़ जमीन को लेकर बिल्डर देवव्रत नाथ शाहदेव और अनिल टाइगर के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था।

बताया गया कि बिल्डर विवादित जमीन पर कब्जा करना चाहता था, जबकि स्थानीय ग्रामीण इसका विरोध कर रहे थे। अनिल टाइगर ग्रामीणों के समर्थन में खड़े थे और कथित कब्जे का विरोध कर रहे थे। दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन विवाद का समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद अनिल टाइगर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस इस हत्याकांड की जांच के दौरान कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और मामले की सुनवाई अदालत में जारी है।

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