Bargi Dam Cruise Accident: लापरवाही के बोझ से डूबा क्रूज? फ्री टिकट और लापरवाही ने बढ़ाया लाशों का आंकड़ा

तूफानी हवाओं के बीच डूबा क्रूज, लाइफ जैकेट के लिए मची चीख-पुकार; असली सवारियों की संख्या अब भी रहस्य


Bargi Dam Cruise Accident: मध्य प्रदेश के Bargi Dam में गुरुवार शाम हुआ क्रूज हादसा अब एक भयावह त्रासदी में बदल चुका है। ‘नर्मदा क्वीन’ नामक क्रूज तूफानी हवाओं और उफनती लहरों के बीच बेकाबू होकर पलट गया, जिसमें अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अब भी लापता हैं।

यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही, अव्यवस्था और अनदेखी का खौफनाक नतीजा बनकर सामने आया है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस घटना की भयावहता को और भी गहरा कर देते हैं।

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Bargi Dam Cruise Accident: दिल्ली की संगीता कोरी, जो इस हादसे से बच निकलीं, ने बताया कि शाम करीब 6 बजे जब क्रूज वापस लौट रहा था, तभी अचानक मौसम ने करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं और देखते ही देखते पानी क्रूज के अंदर भरने लगा। कुछ ही पलों में सैर का सफर मौत के जाल में बदल गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यात्रियों को पहले से लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई थी। जब हालात बिगड़े, तब स्टाफ ने स्टोर रूम से जैकेट निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। जान बचाने के लिए यात्रियों के बीच छीना-झपटी मच गई और हर कोई खुद को बचाने की जद्दोजहद में जुट गया।

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शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद क्रूज का संचालन किया गया। स्थानीय लोगों ने भी चालक को रुकने का इशारा किया था, लेकिन अनुभव की कमी और लापरवाही ने इस हादसे को न्योता दे दिया।

घटना के बाद राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। सेना और NDRF की टीमें हाइड्रोलिक मशीनों और गैस कटर की मदद से डूबे क्रूज को काटकर शवों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

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Bargi Dam Cruise Accident: इस हादसे का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यात्रियों की संख्या को लेकर बना सस्पेंस है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, क्रूज पर 29 पर्यटक और 2 क्रू मेंबर सवार थे, लेकिन स्थानीय सूत्रों और चश्मदीदों का दावा है कि यह संख्या 40 से भी ज्यादा हो सकती है।

बताया जा रहा है कि 5 साल से कम उम्र के 10-12 बच्चों का कोई टिकट नहीं था, जिससे उनकी गिनती रिकॉर्ड में नहीं हुई। इसके अलावा, कुछ लोगों को बिना टिकट या ‘फ्री’ में बैठाए जाने की आशंका ने प्रशासन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। यही वजह है कि अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि वास्तव में कितने लोग इस हादसे का शिकार हुए हैं।

पर्यटन विभाग के रिसॉर्ट से महज 100 मीटर दूर हुए इस हादसे ने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षमता से अधिक सवारियां और सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब जांच के दायरे में है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राहत कार्यों की निगरानी की जा रही है। सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है, जबकि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से भी आर्थिक मदद का ऐलान किया गया है।

मृतकों में जबलपुर, दिल्ली और तमिलनाडु के लोग शामिल हैं। वहीं 9 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं।

बरगी डैम में साल 2006 से पर्यटन के लिए क्रूज संचालन किया जा रहा है, जहां आमतौर पर एक क्रूज की क्षमता 60 से 90 लोगों तक होती है। लेकिन इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या नियमों को नजरअंदाज कर यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ किया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह हादसा रोका जा सकता था? फिलहाल जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन जो जख्म इस घटना ने दिए हैं, वो लंबे समय तक नहीं भरने वाले।

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