भट्ट का जौला रेसिपी: पहाड़ों का सुपरफूड जो स्वाद और सेहत दोनों का खजाना…जानें आसान तरीका और फायदे

Bhatt ka Jaula Recipe: The Mountain Superfood—A Treasure Trove of Both Taste and Health... Learn the Easy Method and Its Benefits.

उत्तराखंड: पहाड़ों का पारंपरिक खानपान हमेशा से अपनी सादगी और सेहतमंद गुणों के लिए जाना जाता है। ऐसी ही एक खास और पौष्टिक डिश है भट्ट का जौला, जो उत्तराखंड के गांवों में लंबे समय से बनाई जा रही है। यह न सिर्फ स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को ऊर्जा और ताकत देने वाला सुपरफूड भी माना जाता है।

सिर्फ दो चीजों से तैयार होने वाली पारंपरिक डिश

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भट्ट का जौला मुख्य रूप से काले भट्ट यानी पहाड़ी सोयाबीन और चावल से बनाया जाता है। कम सामग्री में तैयार होने के बावजूद यह डिश पोषण से भरपूर होती है। ठंड के मौसम में इसे विशेष रूप से खाया जाता है क्योंकि यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है।

भट्ट का जौला क्या होता है?

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यह एक तरह का पारंपरिक दलिया जैसा भोजन है, जो भट्ट और चावल को धीमी आंच पर पकाकर बनाया जाता है। इसका स्वाद हल्का और सादा होता है, लेकिन इसके पोषक तत्व इसे बेहद खास बनाते हैं। कई लोग इसे देसी घी और हरी मिर्च के साथ खाना पसंद करते हैं।

भट्ट का जौला बनाने के लिए जरूरी सामग्री

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इस रेसिपी के लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती।
भट्ट (काला सोयाबीन), चावल, पानी, हल्दी, नमक, घी, जीरा, हींग और चाहें तो जम्बू जैसी पहाड़ी जड़ी-बूटी का उपयोग किया जाता है।

भट्ट का जौला बनाने की आसान विधि

सबसे पहले भट्ट को साफ करके रातभर पानी में भिगो दिया जाता है।
सुबह इसे चावल के साथ कुकर में डालकर हल्दी, नमक और पानी मिलाया जाता है।
इसके बाद इसे धीमी आंच पर लगभग एक घंटे तक पकाया जाता है। बीच-बीच में चलाते रहना जरूरी होता है ताकि यह तले में न लगे।जब इसका रंग हल्का भूरा हो जाए और अच्छी खुशबू आने लगे, तो समझा जाता है कि भट्ट का जौला तैयार है। अंत में स्वाद के लिए इसमें थोड़ा सा देसी नमक मिलाया जाता है।

क्यों माना जाता है यह सुपरफूड?

भट्ट में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल पाए जाते हैं, जबकि चावल शरीर को ऊर्जा देता है। दोनों का संयोजन इसे एक संतुलित और पौष्टिक भोजन बनाता है।

भट्ट का जौला खाने के फायदे

यह शरीर को ताकत देने में मदद करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है।
फाइबर की वजह से यह लंबे समय तक पेट भरा रखता है और बार-बार भूख लगने की समस्या को कम करता है।
सर्दियों में यह शरीर को गर्म रखने में भी सहायक माना जाता है।

गांवों से शहरों तक बढ़ती लोकप्रियता

पहाड़ों की यह पारंपरिक डिश अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रही। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोग भी इसे अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। कम मसालों और ज्यादा पोषण के कारण यह आज फिटनेस पसंद लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

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