साहिबगंज के DC से ED ने की 7 घंटे पूछताछ, 6 फरवरी को फिर बुलाया

रांची। 1000 करोड़ के अवैध पत्थर खनन मामले में मनी लांड्रिंग केस में जांच जारी है। ईडी ने सोमवार को साहिबगंज के उपायुक्त रामनिवास यादव से ईडी के रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पूछताछ की। ईडी ने उनसे करीब सात घंटे तक पूछताछ की। वे सुबह 11 बजे ईडी के दफ्तर में पहुंचे थे और शाम के छह बजे इस वादे के साथ निकले। छह फरवरी को वे फिर से ईडी के समक्ष पेश होंगे। बताया जा रहा है कि ईडी के सवालों पर डीसी थोड़े असहज दिखे।
उन्होंने सवालों का जवाब देने के लिए दस दिनों का वक्त देने की बात दुहराई है। इस दरम्यान ईडी ने उपायुक्त को उनके अधिकारों का हवाला देते हुए पूछा कि अवैध खनन रोकने की पूरी जिम्मेदारी संबंधित जिले के उपायुक्त व एसपी की होती है, इसके बावजूद उनके जिले में खूब अवैध खनन व परिवहन हुआ। उन्होंने अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाया। ऐसी क्या परिस्थिति रही कि अवैध खनन को रोकने में वे विफल रहे।
ईडी द्वारा डीसी से साहिबगंज में हुए 1000 करोड़ रुपए के अवैध खनन मामले में सीएम हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि रहे पंकज मिश्रा के जेल में रहते फोन पर बातचीत से जुड़े सवाल जवाब किए गए. बता दें कि ईडी द्वारा अवैध खनन के आरोप में जेल में बंद पंकज मिश्रा से बात करनेवाले सचिवालय व जिला स्तर के भी 20 से ज्यादा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को चिह्नित किया गया है. इन अधिकारियों में साहिबगंज के डीसी रामनिवास यादव और एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा का भी नाम शामिल है.
मार्च 2022 में साहिबगंज से मनिहारी घाट जा रहे जहाज में कई गाड़ियां ओवरलोडिंग की वजह से गंगा में डूब गई थी. मामले में डीसी रामनिवास यादव ने तत्कालीन दुमका कमिश्नर चंद्रमोहन कश्यप को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी. रिपोर्ट में कमिश्नर को कई तरीके की खामियां मिली थी और डीसी से दोबारा रिपोर्ट सबमिट करने को कहा था. आरोप है कि तब पंकज मिश्रा ने कमिश्नर को फोन कर कहा था कि जलयान के जरिए ट्रांसपोर्टिंग का पूरा कामकाज उनका ही है और डीसी ने जो रिपोर्ट भेजी है, उसे स्वीकार किया जाए. कमिश्नर द्वारा ईडी को दिए गये बयान में इस बात का समर्थन किया गया है. बता दें कि ये मामला भी अवैध माइनिंग और परिवहन से जुड़ा है. ऐसे में ईडी द्वारा डीसी साहिबगंज से सवाल-जवाब किया गया.











