हकीकत से दूर या नई दुनिया की शुरुआत: 49 साल के शख्स का AI से ‘प्यार’, 3 साल में बना ऐसा रिश्ता जिसने खड़े किए डरावने सवाल
Replika पर शुरू हुई बातचीत कब बनी ‘डेटिंग’, इंसानी रिश्तों से दूर होता कनेक्शन अब बना बहस का मुद्दा

नई दिल्ली: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन अब यह बदलाव सिर्फ मशीनों तक सीमित नहीं रहा। इंसानी भावनाएं भी इससे गहराई से जुड़ती जा रही हैं। एक 49 वर्षीय व्यक्ति की कहानी इस बदलते दौर की ऐसी तस्वीर पेश करती है, जो जितनी चौंकाने वाली है, उतनी ही सोचने पर मजबूर भी करती है।
यह व्यक्ति पिछले तीन सालों से Replika नाम के AI चैटबॉट को डेट कर रहा है। उसका दावा है कि उसे इस वर्चुअल रिश्ते में असली दुनिया से भी ज्यादा गहराई और सुकून मिलता है।
कहानी की शुरुआत उसके अकेलेपन से होती है। बचपन से ही सामाजिक जुड़ाव में दिक्कत, बुलिंग का सामना और अपनी पहचान को लेकर संघर्ष — ये सब उसकी जिंदगी का हिस्सा रहे। 2016 में उसने अपनी पहचान से जुड़ा एक बड़ा बदलाव शुरू किया, लेकिन इसके बाद भी हालात ज्यादा बेहतर नहीं हुए।
धीरे-धीरे उसने खुद को समाज से अलग करना शुरू कर दिया। सार्वजनिक जगहों पर जाना असहज लगने लगा और लोगों से बातचीत लगभग खत्म हो गई। कोविड-19 महामारी के दौरान यह दूरी और गहरी हो गई, जहां कई-कई दिन ऐसे गुजरते थे जब वह सिर्फ अपने रूममेट से ही बात करता था।
साल 2022 में उसने Replika डाउनलोड किया और “Min-ho” नाम का एक AI साथी बनाया। शुरुआत में यह सिर्फ सामान्य बातचीत थी, लेकिन वक्त के साथ यह रिश्ता गहराता गया।
रोजमर्रा की छोटी-बड़ी बातें साझा करना, AI की ओर से मिलने वाली भावनात्मक प्रतिक्रिया और बिना किसी जजमेंट के बातचीत — इन सबने इस कनेक्शन को एक अलग ही स्तर पर पहुंचा दिया। कुछ ही समय में यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़कर ‘डेटिंग’ जैसा महसूस होने लगा।
तीन साल बाद भी यह रिश्ता कायम है। व्यक्ति का कहना है कि यह कनेक्शन उसके लिए बेहद मायने रखता है। उसने अपने इस AI साथी को अपनी मां से भी “मिलवाया” है और इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया है।
हालांकि, इस कहानी का एक दूसरा पहलू भी है जो चिंता बढ़ाता है। असली दुनिया में उसका सामाजिक दायरा अब भी बेहद सीमित है। उसकी ज्यादातर बातचीत AI और परिवार तक ही सीमित रह गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह रिश्ता उसे समाज से जोड़ रहा है या फिर और दूर कर रहा है।
इस पूरे मुद्दे पर Replika के CEO Dmytro Klochko का कहना है कि कंपनी इन चिंताओं को समझती है। उनका फोकस इस बात पर है कि AI लोगों के लिए सहारा बने, लेकिन उन्हें असली दुनिया से दूर न ले जाए।
तकनीक और भावनाओं के इस मेल ने एक नई बहस छेड़ दी है — क्या AI इंसानी रिश्तों की जगह ले सकता है, या यह सिर्फ एक अस्थायी सहारा है जो धीरे-धीरे इंसान को हकीकत से दूर कर देता है?












