वित्त मंत्री डा रामेश्वर उरांव ने माना की सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती,1932 आधारित स्थानीय नीति पर भी रखी अपनी बात, पढ़िए डिटेल

जमशेदपुर । वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने जमशेदपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह सच है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती. हालांकि, यह कहने पर सरकारी स्कूलों के शिक्षक उलझ पड़ते हैं. लेकिन, वे भी यह मानते हैं कि प्राइवेट स्कूलों में अच्छी पढ़ाई होती है. यही वजह है कि जो भी व्यक्ति आर्थिक रूप से थोड़ा भी सक्षम है, वह अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहता है. प्राइवेट स्कूलों में बेहतर पढ़ाई, अनुशासन है. और इसी वजह से प्राइवेट स्कूल की तरफ रुझान बढ़ता जा रहा है।

श्री उरांव ने उक्त बातें सोमवार को सिदगोड़ा के बिरसा मुंडा टाउन हॉल में पासवा की ओर से आयोजित जिलास्तरीय प्रतिभा सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि ये बात कही. इस मौके पर पासवा की ओर से तीन हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया. डॉ उरांव ने कहा कि स्कूलों में प्रार्थना के बाद बच्चों को समाचार सुनायें. राज्य, देश और दुनिया में क्या हो रहा है, बच्चों को यह जानना चाहिए.

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1932 आधारित स्थानीय नीति पर कहा

उन्होंने कहा कि 1932 के खतियान को लेकर पहले भी कानूनी लड़ाई लड़ी जा चुकी है. लेकिन हर बार न्यायालय में अपना मजबूत पक्ष नहीं बना पाती।वर्तमान सरकार चाहती है कि 1932 के खतियान को आधार बनाकर स्थानीय नीति लागू करे, इस मुद्दे पर वे सरकार के साथ हैं.

1932 आधारित स्थानीय नीति बनाने के लिए इसके कानूनी पक्ष का अध्ययन करना, संविधान के अनुरूप चीजें हों, यह भी सुनिश्चित कराना होगा ताकि कोर्ट में यह कानून ठहर सके. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में स्थानीयता को लेकर जो पहले पैमाना तय हुआ था, उसका आधार बिहार सरकार में पहले सर्टिफिकेट के लिए तय प्रावधान है. वह कभी भी स्थानीय लोगों को हक नहीं दिला सकता है.

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