सरकार जिम्मेदारी ले, नहीं तो जनता सबक सिखाएगी— राज्यसभा में खड़गे का हमला, अमित शाह के इस्तीफे की मांग
पेपर लीक संशोधन बिल पर कांग्रेस अध्यक्ष का केंद्र पर तीखा प्रहार, NTA में सुधार, वार्षिक परीक्षा कैलेंडर और छात्रों पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल

नई दिल्ली: राज्यसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माने का प्रावधान बढ़ा देने से पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान नहीं होगा। सरकार को इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, अन्यथा जनता उसे सबक सिखाएगी।
खड़गे ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्ष 2024 में ही सख्त कानून लाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस समय इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया।
’12 साल में पहली बार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ’
राज्यसभा में बोलते हुए खड़गे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में करीब सवा लाख छात्रों ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि इसी दौरान पहली बार किसी शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा, जो सरकार की विफलता को दर्शाता है।
‘NTA में सुधार नहीं हुआ तो फिर होंगे पेपर लीक’
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में भी पेपर लीक की घटनाएं दोहराई जाएंगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल मंत्री बदलकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, जबकि परीक्षा प्रणाली में जरूरी सुधार नहीं किए गए। उनके अनुसार, लंबे समय से सक्रिय पेपर लीक गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
‘बिल अधूरा है, रोकथाम की ठोस योजना नहीं’
खड़गे ने संशोधन विधेयक को अधूरा बताते हुए कहा कि इसमें केवल दंड और जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन पेपर लीक रोकने के लिए कोई स्पष्ट और प्रभावी रणनीति नहीं दिखाई देती।
उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के देशव्यापी विरोध और बढ़ते दबाव के बाद यह विधेयक लेकर आई है।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग
छात्र आंदोलनों के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए खड़गे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सवाल खड़े किए और उनसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की।
वार्षिक परीक्षा कैलेंडर लागू करने की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को वार्षिक परीक्षा कैलेंडर (Annual Examination Calendar) जारी करना चाहिए, ताकि भर्ती परीक्षाओं और परिणामों में अनिश्चितता खत्म हो सके।
उन्होंने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुए स्वागत समारोह पर भी तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत ऐसे किया गया, मानो वे कोई बड़ी जीत हासिल करके लौटे हों।
सियासी घमासान तेज
पेपर लीक संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में हुई बहस के बाद शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़क तक बहस और विरोध की राजनीति जारी रहने की संभावना है।









