ये कैसे विडंबना है: खुद को जिंदा साबित करने 84 साल की महिला लगा रही दफ्तरों के चक्कर, मिला सिर्फ आश्वासन

गिरिडीह जिले में एक बुजुर्ग महिला सरकारी बाबू की लापरवाही से दस्तावेजों मृत घोषित कर दी गई. अब बुजुर्ग महिला खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है. 84 साल की हसमुन खातून बीते 1 साल से ब्लॉक ऑफिस के बाबू को यह बताती फिर रही है कि वह जिंदा है. बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हो रही है.
बुजुर्ग महिला हसमुन खातून तिसरी ब्लॉक के सिंघो पंचायत के ककनी गांव की रहने वाली हैं. 84 साल की उम्र में ब्लॉक ऑफिस के चक्कर काट रही हैं. जानकारी के मुताबिक बीते साल किसी सरकारी बाबू ने बुजुर्ग महिला को मृत घोषित कर दिया और उनकी वृद्धा पेंशन को रद्द कर दिया था. इसके बाद से हसमुन खातून कागजात लेकर ब्लॉक ऑफिस के चक्कर काट रही हैं. फिलहाल उन्हें अधिकारियों की तरफ से केवल आश्वासन ही मिल रहा है.
बुजुर्ग महिला हसमुन खातून बताती है कि उन्हें वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा था. लगभग 1 साल पहले तिसरी ब्लॉक से सत्यापन के लिए 2 सरकारी कर्मचारी गांव पहुंचे थे. इस दौरान गांव के ही किसी व्यक्ति के कहने पर उन सरकारी बाबुओं ने महिला को मृत मान कर वृद्धा पेंशन रद्द कर दी. पेंशन बंद होने के बाद से वे लगातार ब्लॉक के दफ्तर आ रही हैं, लेकिन उन्हें हर बार मायूस होकर लौटना पड़ रहा है. मामला जब सिंघो पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया मो. हासिममुद्दीन के पास पहुंचा तो उन्होंने बीडीओ को इसकी जानकारी दी.
बीडीओ ने कहा कि मामले को संज्ञान में लेते हुए पेंशन सूची में सुधार के लिए जिला कार्यालय भेज दिया गया है. जल्द ही हसमुन खातून को पेंशन का लाभ दोबारा मिलना शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि स्थानीय कर्मचारी की लापरवाही से ऐसा हुआ है. जिसकी वजह से बुजुर्ग महिला को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है. लिहाजा सभी कर्मचारियों को गहनता से सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं.











