मैं अगर मर जाऊं तो तुम…प्रेमानंद महाराज का दिव्य मंत्र जिसने लाखों भक्तों की सोच बदल दी!…
झूठी खबरों के बीच वायरल हुआ संत का जीवन संदेश — सुनने के बाद हर किसी की आंखें नम हो गईं

सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से संत प्रेमानंद जी महाराज के स्वास्थ्य को लेकर तरह-तरह की अफवाहें फैल रही थीं।
कई वीडियो और पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि महाराज की तबीयत बेहद खराब है, जिससे भक्तों में घबराहट और बेचैनी फैल गई। लेकिन आश्रम प्रशासन और पुलिस ने साफ किया है कि —
“संत प्रेमानंद जी पूर्णतः स्वस्थ हैं और प्रतिदिन अपने अनुयायियों को आध्यात्मिक मार्गदर्शन दे रहे हैं।”
‘मैं अगर कल मर जाऊं तो तुम…’ — जीवन बदल देने वाला संदेश
इसी बीच सोशल मीडिया पर महाराज का एक प्रवचन वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें उन्होंने भक्तों को जीवन का सबसे गहरा सत्य समझाया।
महाराज कहते हैं —
“मैं अगर कल मर जाऊं तो तुम आजीवन हमारी वाणी के अनुसार चलना, धर्मपूर्वक चलना।
कभी धर्म से विरुद्ध मत चलना।
कभी किसी वैभव या धन के गुलाम मत बनना,
किसी के भी गुलाम मत बनना — केवल श्रीजी के गुलाम बनना।”ये खबर भी पढ़ें…
इस एक संदेश में मृत्यु को स्वीकार करने, मोह-माया से दूर रहने और केवल भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा छिपी है।
बीमारी के बावजूद भक्ति में अडिग
महाराज पिछले लंबे समय से Polycystic Kidney Disease नामक बीमारी से जूझ रहे हैं।
पहले वे सप्ताह में 5 दिन डायलिसिस कराते थे, लेकिन अब यह रोजाना किया जा रहा है।
इसके बावजूद, वे राधारानी और श्रीकृष्ण के नाम में लीन रहते हैं।
वे कहते हैं — “मेरी दोनों किडनियां नहीं, ये तो ‘राधा’ और ‘कृष्णा’ हैं, जो मुझे जीवित रखे हुए हैं।”
आश्रम में विशेष चिकित्सा व्यवस्था
महाराज का इलाज श्री कृष्ण शरणम् सोसाइटी, वृंदावन में ही किया जा रहा है।
डायलिसिस के लिए अलग फ्लैट में विशेष मेडिकल यूनिट बनाई गई है, जहां छह डॉक्टरों की टीम दिन-रात सेवा में लगी है।
इस टीम में ऑस्ट्रेलिया के एक हृदय रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं। भक्तों का अटूट प्रेम — लोग देना चाहते हैं ‘जीवन’
संत प्रेमानंद महाराज के प्रति श्रद्धा का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि
कई भक्तों और प्रमुख हस्तियों ने उन्हें किडनी दान करने की इच्छा जताई है।
यहां तक कि अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा ने भी उनसे मुलाकात कर यह प्रस्ताव रखा था।
कौन हैं संत प्रेमानंद जी महाराज?
कानपुर के आकरी गांव में जन्मे अनिरुद्ध कुमार पांडे, केवल 13 वर्ष की आयु में घर छोड़कर अध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े।
उन्होंने काशी में गौरी शरण जी महाराज के सान्निध्य में 15 महीने तक साधना की और बाद में वृंदावन आकर राधा-कृष्ण भक्ति में लीन हो गए।
आज वे भक्ति, अनुशासन और आत्मसंयम के प्रतीक बन चुके हैं।
“मृत्यु नहीं, भक्ति ही अमरता है” — महाराज का संदेश
प्रेमानंद महाराज का यह संदेश केवल एक प्रवचन नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने वाला मंत्र है।
उन्होंने सिखाया कि मृत्यु का भय नहीं, बल्कि धर्म से विचलित होना ही असली मृत्यु है।












