शादी अपनी मर्जी से की तो गांव में नहीं मिलेगी एंट्री! इस गांव के महापंचायत के इन फैसलों से मचा हड़कंप…

जींद: हरियाणा के जींद जिले में आयोजित एक महापंचायत में लिए गए कुछ सख्त सामाजिक फैसलों ने चर्चा तेज कर दी है। रामराय गांव के चबूतरे पर नौगामा खाप के अंतर्गत आने वाले 21 गांवों के सर्व समाज की महापंचायत हुई, जिसमें सामाजिक मर्यादा और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े कई अहम प्रस्ताव पारित किए गए।
महापंचायत में सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है, जिसके तहत परिवार की मर्जी के खिलाफ घर से भागकर शादी करने वाले युवक-युवती के गांव में प्रवेश पर रोक लगाने की बात कही गई है।
भागकर शादी करने वालों की गांव में नो-एंट्री
महापंचायत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव रखा गया कि नौगामा खाप के 21 गांवों में यदि कोई युवक या युवती परिवार की सहमति के बिना घर से भागकर विवाह करता है, तो ऐसे जोड़े को गांव में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।
खाप की ओर से इस फैसले के पीछे पारिवारिक गरिमा और सामाजिक अनुशासन को बनाए रखने की बात कही गई है। साथ ही परिवारों के बीच संवाद और आपसी सहमति को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
शादी में अश्लील गाने बजाने पर भी रोक
महापंचायत में विवाह समारोहों में बजने वाले अश्लील और आपत्तिजनक गानों को लेकर भी कड़ा फैसला लिया गया। प्रस्ताव के मुताबिक, शादी-ब्याह और अन्य सामाजिक आयोजनों में ऐसे गाने बजाने की अनुमति नहीं होगी, जिन्हें पंचायत सामाजिक मर्यादा के खिलाफ मानती है।
निर्णयों का उल्लंघन करने वाले परिवार को पहले समझाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बावजूद बात नहीं मानने पर सामाजिक स्तर पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
लव मैरिज और लिव-इन पर सरकार से कानून की मांग
महापंचायत में प्रेम विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का मुद्दा भी उठा। खाप ने सरकार से मांग करने का निर्णय लिया कि ऐसे मामलों में माता-पिता की सहमति को कानूनी रूप से अनिवार्य किया जाए।
खाप का कहना है कि परिवार की भागीदारी सुनिश्चित होने से भविष्य में विवाद और अप्रिय घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।
अब दूसरे संगठनों तक पहुंचेंगे ये फैसले
नौगामा खाप के प्रधान जयबीर लोहान ने बताया कि रामराय में हुई महापंचायत में 21 गांवों के प्रतिनिधियों ने इन प्रस्तावों पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इन फैसलों को प्रदेश की अन्य खापों और प्रमुख सामाजिक संगठनों तक भी पहुंचाया जाएगा।
महापंचायत के इन फैसलों के बाद अब इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या दूसरे सामाजिक संगठन भी ऐसी पहल का समर्थन करेंगे और क्या इन प्रस्तावों का असर व्यापक स्तर पर देखने को मिलेगा।












