सिर्फ 30 मिनट में भारत ने रच दिया इतिहास! कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो से आई डबल गोल्ड की खुशखबरी
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने लगातार दो स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास, भारतीय जूडो को मिले पहले महिला और पुरुष कॉमनवेल्थ गोल्ड; यामिनी मौर्य ने भी फाइनल में बनाई जगह।

Sports Desk: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो टीम ने ऐसा इतिहास रचा है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। महज 30 मिनट के भीतर अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपने-अपने वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को डबल गोल्ड दिलाया। दोनों खिलाड़ियों की इस शानदार सफलता ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। वहीं, यामिनी मौर्य के फाइनल में पहुंचने से भारत का कम से कम एक और पदक भी पक्का हो गया है।
अस्मिता डे ने तोड़ा 36 साल का इंतजार
23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में कनाडा की खिलाड़ी को रोमांचक गोल्डन स्कोर मुकाबले में हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वह कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं।
फाइनल की शुरुआत उनके लिए आसान नहीं रही। शुरुआती दौर में उन्हें युको गंवाना पड़ा और एक पेनल्टी भी मिली, लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को गोल्डन स्कोर तक पहुंचाया और आखिरकार ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भारत का 36 वर्षों का गोल्ड का इंतजार भी खत्म हो गया।
हर्ष सिंह ने भी बनाया नया रिकॉर्ड
अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के लगभग 30 मिनट बाद 23 वर्षीय हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।
इस जीत के साथ हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय दल की खुशी को दोगुना कर दिया।
भारत की पदक तालिका में बड़ी छलांग
जूडो में लगातार दो स्वर्ण पदक मिलने के बाद भारत ने पदक तालिका में शानदार बढ़त बनाई है। भारतीय दल अब 9वें स्थान पर पहुंच गया है।
अब तक भारत के खाते में:
- 🥇 5 स्वर्ण पदक
- 🥈 10 रजत पदक
- 🥉 4 कांस्य पदक
यानी भारत ने कुल 19 पदक अपने नाम कर लिए हैं।
एक और पदक लगभग तय
भारतीय खिलाड़ी यामिनी मौर्य भी अपने वर्ग के फाइनल में पहुंच चुकी हैं। ऐसे में भारत का कम से कम एक रजत पदक पक्का हो गया है, जबकि फाइनल जीतने पर स्वर्ण पदकों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ है और इससे आने वाले मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों का मनोबल भी निश्चित रूप से बढ़ेगा।








