झारखंड: भाजपा विधायक फसेंगे या बचेंगे ? जमीन घोटाले की जाल में उलझे विधायक ने दी सफाई, बोले, मैने कभी भी …

Jharkhand: Will BJP MLAs be caught or saved? The MLA embroiled in a land scam has clarified, saying, "I never...

हजारीबाग। भाजपा विधायक बचेंगे या फसेंगे ? वन भूमि और सरकारी जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त के बड़े घोटाले में फंसे विधायक प्रदीप प्रसाद की मुश्किलें बढ़ सकती है। एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की जांच के दायरे में आये हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद का इस मामले में अब बयान आया है।

 

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विधायक प्रदीप प्रसाद ने दी सफाई

आरोप है कि साल 2010 में एक विवादित वन भूमि की रजिस्ट्री में विधायक बतौर “पहचानकर्ता” शामिल हुए थे। यह वही भूमि है, जिस पर अब एक बड़ा शोरूम बना हुआ है।आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने किसी भी गलत काम से खुद को अलग बताया है। उन्होंने कहा,“मैं किसी भी गलत कृत्य का समर्थक न कभी रहा हूं और न कभी रहूंगा। रही बात आरोपों की, तो यह जांच का विषय है। मुझे एजेंसी और सरकार पर पूरा भरोसा है। समय आने पर सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।”

 

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एसीबी की बड़ी कार्रवाई, अफसर और कारोबारी जेल में

 

एसीबी पिछले कुछ महीनों से सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री के मामलों की जांच कर रही है। इसी क्रम में एसीबी ने हाल ही में हजारीबाग के तत्कालीन उपायुक्त विनय कुमार चौबे, तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार, जमीन कारोबारी और शोरूम मालिक विनय सिंह को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। अदालत ने इन सभी को न्यायिक हिरासत में हजारीबाग सेंट्रल जेल भेज दिया है।

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सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रजिस्ट्री के समय विधायक प्रदीप प्रसाद की भूमिका “पहचानकर्ता” के रूप में दर्ज है। एसीबी का कहना है कि इस पहचान के माध्यम से वन भूमि के अवैध हस्तांतरण को वैध ठहराने की कोशिश की गई।

 

विवादित भूमि सदर अंचल क्षेत्र में

पूरा मामला सदर अंचल में स्थित एक विवादित जमीन का है, जिसे कथित रूप से वन भूमि और भूदान की जमीन बताया गया है। इस जमीन की रजिस्ट्री के दौरान कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई। तत्कालीन सदर सीओ अलका कुमारी से भी इस मामले में पूछताछ की गई थी, जिन्होंने बाद में अदालत में बयान देकर सरकारी गवाह बनने की सहमति दी।

 

73 लोगों पर मामला दर्ज

एसीबी ने इस प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण वाद संख्या 11/2025 के तहत कुल 73 लोगों को अभियुक्त बनाया है, जिनमें 68 नामजद हैं। मामला 25 सितंबर 2025 को दर्ज किया गया था।

एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 420, 467, 468, 471, 120(बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1) व 13(2) लगाई गई हैं।

चर्चित नामों की लंबी सूची

इस बहुचर्चित भूमि घोटाले में कई बड़े नाम सामने आए हैं —

• शैलेश कुमार, तत्कालीन अंचल अधिकारी

• अलका कुमारी, वर्तमान में डीआरडीए निदेशक, चतरा

• राजेंद्र प्रसाद सिंह, अंचल निरीक्षक

• राम प्रकाश चौधरी, राजस्व कर्मचारी

• संतोष कुमार वर्मा, भू-माफिया

जांच एजेंसी का कहना है कि इन सभी ने मिलकर सरकारी भूमि — वन भूमि, भूदान, गोचर और गैर-मजरूवा आम/खास जमीन — की फर्जी कागजात बनाकर रजिस्ट्री कराई और अवैध तरीके से जमाबंदी कराई।

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