झारखंड हाईकोर्ट ने DSE को किया तलब: आदेश के बावजूद शिक्षक को नहीं दी ज्वाइनिंग, अब हाईकोर्ट ने डीएसई को तलब कर मांगा जवाब, जानें पूरा मामला

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने DSE की कार्यशैली पर नाराजगी जतायी है। अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने डीएसई से पूछा है कि, आखिर कोर्ट के आदेश के बावजूद निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। पूरा मामला पलामू का है, जहां सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) पलामू के प्रति सख्त रुख अपनाया है।

कोर्ट ने एकल पीठ के आदेश का पालन नहीं होने पर DSE को 5 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही पूछा है कि आदेश की अवहेलना के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। अब हाईकोर्ट के आदेश पर डीएसई को कोर्ट में जवाब देना होगा और उचित कारण बताना होगा, जिसकी वजह से आदेश का पालन नहीं किया गया।

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सरकार का समय बढ़ाने का आग्रह भी ठुकराया
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एकल पीठ के आदेश का पूर्ण पालन करते हुए शिक्षक नंदू राम को पुनर्बहाली से पहले की अवधि के सभी सेवा लाभ दिए जाएं। हालांकि सरकार ने आदेश के पालन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन अदालत ने यह आग्रह खारिज कर दिया।

‘सिर्फ दिखावे के लिए की गई पुनर्बहाली’
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट रूल-393 के तहत नोटिस मिलने के बाद मई 2026 में नंदू राम को पुनर्बहाल तो कर दिया गया, लेकिन जिस अवधि में उन्हें कथित रूप से गलत तरीके से सेवा से बाहर रखा गया था, उस दौरान के वेतन और अन्य सेवा लाभ नहीं दिए गए।

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उन्होंने दलील दी कि एकल पीठ ने पुनर्बहाली के साथ सभी बकाया लाभ देने का स्पष्ट आदेश दिया था। राज्य सरकार की अपील भी हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही खारिज कर चुकी है, इसलिए आदेश का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए।

अवसाद के कारण गए थे अवकाश पर
नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को पलामू जिले के विश्रामपुर स्थित सरकारी मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। करीब पांच वर्ष सेवा देने के बाद वे गंभीर अवसाद (Acute Depression) से पीड़ित हो गए और उपचार के लिए अवकाश पर चले गए। उन्होंने विभाग को अवकाश बढ़ाने का आवेदन भी भेजा था।

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2012 में लौटे तो जॉइनिंग से किया इनकार
लंबे इलाज के बाद चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित होने पर नंदू राम 19 जनवरी 2012 को विद्यालय में योगदान देने पहुंचे, लेकिन विभाग ने उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया और सेवा से बर्खास्त कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए पुनर्बहाली और सभी सेवा लाभ देने का आदेश दिया था। बाद में राज्य सरकार की अपील भी खंडपीठ ने खारिज कर दी। अब आदेश के पालन में लापरवाही पर हाईकोर्ट ने DSE पलामू को तलब कर जवाब मांगा है।

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