Jharkhand Panchayat Election 2027: पहली बार पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण, सरकार ने शुरू की तैयारी
पंचायत चुनाव में बड़ा बदलाव, OBC वर्ग को मिलेगा प्रतिनिधित्व
रांची। झारखंड में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2027 को लेकर सरकार ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। इस बार चुनावी प्रक्रिया में अहम बदलाव करते हुए ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने की योजना बनाई जा रही है।
नगर निकाय चुनाव की तर्ज पर पंचायत स्तर पर भी ओबीसी के लिए सीटें आरक्षित की जाएंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ेगा।
OBC-1, OBC-2 और महिलाओं के लिए अलग आरक्षण
नई व्यवस्था के तहत ओबीसी वर्ग को अलग अलग श्रेणियों में बांटकर आरक्षण लागू किया जाएगा। इसमें OBC-1, OBC-2 और OBC महिला वर्ग के लिए सीटें निर्धारित की जाएंगी।
इसके लिए पंचायत स्तर पर ओबीसी आबादी का विस्तृत आंकड़ा जुटाया जाएगा, जो राज्य में पहली बार किया जाने वाला कदम होगा।
राज्य गठन के बाद पहली बार मिलेगा यह लाभ
झारखंड के गठन के बाद यह पहला मौका होगा जब पंचायत चुनाव में ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। सरकार इस प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रणाली अपनाने की तैयारी में है।
इस प्रक्रिया के तहत पंचायतवार आबादी का आंकलन कर वैज्ञानिक तरीके से आरक्षण तय किया जाएगा।
ट्रिपल टेस्ट के जरिए तय होगा आरक्षण
पंचायती राज विभाग इस दिशा में तेजी से काम कर रहा है। विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रक्रिया का अध्ययन कर लौटे आईएएस अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ट्रिपल टेस्ट लागू करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसमें डेटा संग्रह, विश्लेषण और निष्पक्ष आधार पर सीटों का निर्धारण शामिल रहेगा, जिससे आरक्षण को कानूनी चुनौती से बचाया जा सके।
2027 चुनाव से पहले पूरी होगी प्रक्रिया
सरकार का लक्ष्य है कि अप्रैल से मई 2027 के बीच संभावित पंचायत चुनाव से पहले सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएं।
अधिकारियों का कहना है कि पिछली बार 2022 में चुनाव देरी से कराए गए थे, लेकिन इस बार समय पर चुनाव कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी भी ली जाएगी।
अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की तैयारी
सूत्रों के अनुसार राज्य के 13 अनुसूचित जिलों में पंचायत चुनाव की आरक्षण व्यवस्था अलग हो सकती है। यहां संवैधानिक प्रावधानों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष नियम लागू किए जा सकते हैं।
क्या बदलेगा इस फैसले से
इस निर्णय के लागू होने से पंचायत स्तर पर सामाजिक संतुलन मजबूत होगा और ओबीसी वर्ग की भागीदारी बढ़ेगी। साथ ही चुनावी प्रक्रिया को अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।












