प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ ने राज्य स्तरीय आंदोलन की रणनीति की तैयार..5 सितंबर से आंदोलन की होगी शुरुआत, ये है मांगें

रांची झारखण्ड राज्य प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संघ अपने राज्यव्यापी कार्यक्रम के तहत मानदेय भुगतान, सहायक अध्यापक सेवा शर्त नियमावली 2021 में संशोधन कर अनुपालन एवं अन्य समस्याओं की समाधान के मांग को लेकर सरकार की ध्यान सहायक अध्यापकों की आकृष्ट कराने को लेकर एक बैठक का आयोजन कर विस्तृत कार्य योजना तैयार किया जिसमें कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव को पारित किया गया।

पारित प्रस्ताव

05 सितम्बर को शिक्षक दिवस पर प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन देंगे ।

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6 एवं 7 सितम्बर 2022 को राज्य के सभी जिला मुख्यालय में पदयात्रा कर उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षक के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को मांग पत्र प्रेषित करेंगे ।

      प्रमुख मांग 

1- जुलाई, अगस्त 2022 का मानदेय समेत शून्य बायोमैट्रिक के कारण रोके गए मानदेय भुगतान अविलंब किया जाए ।

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2- सहायक अध्यापक सेवा शर्त नियमावली 2021 के समझौता अनुसार निम्न बिन्दुओं को संशोधन कर अनुपालन पूर्ण रूप से किया जाए ।
क- समझौता अनुरूप नियमावली में संशोधन कर कर्मचारी भविष्य निधि का लाभ का प्रवधान किया जाए ।
ख- नियमावली एवं समझौता अनुरूप जुलाई 2022 से सहायक अध्यापकों के मानदेय मे 4% वार्षिक वृद्धि का लाभ दिया जाए ।

ग – नियमावली में अनुकम्पा के प्रावधान को लचीला कर लागू किया जाए ।

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घ- सीटेट को पारित नियमावली में संशोधन कर शामिल कर जेटेट के सामान लाभ दिया जाए ।

च – सहायक अध्यापकों के सेवा पुस्तिका का संधारण हेतु आदेश निर्गत किया जाए ।

3- आकलन परीक्षा नियमावली लागू होने के तीन माह के बदले 8 माह में भी ना होने पर प्रमाण पत्रों के जाँच के बहाने आकलन परीक्षा ना रोका जाए, यथाशीघ्र आकलन परीक्षा आयोजित किया जाए ।

4- पुर्व प्रस्तावित समग्र शिक्षा के अधीन कार्यरत संविदा कर्मी व वेलफेयर सोसाइटी का गठन कर सहायक अध्यापकों को कल्याण कोष का लाभ अविलंब दिया जाए एवं नियमावली लागू होने के उपरान्त मृत सहायक अध्यापकों को 5,00,000 का आर्थिक राशि सहयोग दिया जाए ।

5- 6 वर्षों से झारखण्ड टेट का आयोजन नहीं हुआ है, स्थायी नियुक्ति का लाभ हेतु सहायक अध्यापकों को जे टेट का आयोजन यथाशीघ्र किया जाए ।

प्रदेश अध्यक्ष सिद्दीक शेख ,महासचिव विकास कुमार चौधरी एवं प्रधान सचिव सुमन कुमार का संयुक्त वक्तव्य —

शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच के नाम पर राज्य के 62,000 सहायक अध्यापकों का मानदेय रोका जाना न्याय संगत नहीं ,अन्याय है।
सहायक अध्यापक अपने प्रमाण पत्र जाँच के लिए मई 2009 में 85648 पारा शिक्षकों ने 800 रुपये का 06 करोड़ 85 लाख 18 हजार चार सौ रुपया का ड्राफ़्ट विभाग में जमा किया ।
मई 2017 में प्रति पारा शिक्षक 1000 रुपए के दर से
65337 पारा शिक्षकों ने 6 करोड़ 53 लाख सैंतीस हजार रुपये नगद जमा किया ।

बीते माह जुलाई 2022 में सहायक अध्यापकों (पारा शिक्षकों) के विरोध के बावजूद संगठन ने विभाग का सहयोग किया और 61545 सहायक अध्यापकों ने 1200 रू के दर से 7 करोड़ 38 लाख 54 हजार रुपया नगद जमा किया, अगर विभाग को 20 करोड़ 77 लाख 9 हज़ार चार सौ रुपये देकर 20 वर्षों में सरकार अगर पारा शिक्षकों की प्रमाण पत्रों की जांच नहीं कर पाई तो यह सरकार की विफलता है।

प्रमाण पत्र को लेकर वर्ष 2009 एवं 2017 में न्यायालय से शपथ पत्र जमा किया गया ,
आज 20 वर्षों की सेवा काल में कम से कम 22 बार प्रमाण पत्र जाँच के लिए प्रमाण पत्र जमा विभाग में जमा किया गया है, फिर भी हम दोषी। ये अन्याय है, क़ायदे से अधिकारियों का वेतन बंद होना चाहिए था, मगर वेतन हमारा बंद किया गया है।

गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, हजारीबाग ,देवघर ,दुमका ,समेत लगभग राज्य के सभी जिलों में 2015 में प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में बहाल सहायक शिक्षकों का अभी तक प्रमाण पत्र की जांच पूरा नही हो पाया है ,लेकिन न्यायालय के शपथ पत्र के आधार पर वेतन तो मिल ही रहा है, उनकी सेवा की भी संपुष्टि हो गई । फिर हम अल्प मानदेय भोगी जो एक माह मानदेय समय पर ना मिलने पर भूखे रहने की स्थिति हो जाती हैं,आखिर सहायक अध्यापकों का मानदेय प्रमाण पत्र जांच के नाम पर मानदेय क्यों रोका गया ,ये अन्याय क्यों ?

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