झारखंड : 10वीं रिजल्ट के बाद इंटर एडमिशन में कड़ा मुकाबला…बढ़ा कटऑफ बना छात्रों की चिंता

Jharkhand: Stiff Competition for Intermediate Admissions Following Class 10 Results—Rising Cut-offs Spark Student Concern

झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा 10वीं बोर्ड परिणाम जारी होने के बाद इंटर कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया तेज हो गई है। छात्र अपने पसंदीदा कॉलेजों में आवेदन कर रहे हैं, लेकिन इस बार बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा ने एडमिशन को और कठिन बना दिया है।

बेहतर रिजल्ट का असर, इस बार कटऑफ में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना

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कॉलेज प्राचार्यों के अनुसार इस वर्ष छात्रों का प्रदर्शन पिछले सालों की तुलना में बेहतर रहा है। इसी वजह से कई कॉलेजों में कटऑफ बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

साइंस स्ट्रीम में जहां पहले 70 प्रतिशत अंक पर आसानी से एडमिशन मिल जाता था, अब यह सीमा 75 से 80 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

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कॉमर्स और आर्ट्स में भी बढ़ेगा कटऑफ, हजारों छात्रों पर असर

कॉमर्स और आर्ट्स संकाय में भी कटऑफ बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। पहले जहां 60 प्रतिशत पर नामांकन मिल जाता था, अब यह 65 से 70 प्रतिशत तक जा सकता है।

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इस बदलाव से उन छात्रों पर असर पड़ेगा जिन्होंने अच्छे अंक हासिल किए हैं, लेकिन सीटों की सीमित संख्या के कारण उन्हें मनचाहा कॉलेज नहीं मिल पाएगा।

एंट्रेंस टेस्ट बना नया ट्रेंड, मेरिट की भूमिका हुई सीमित

कई प्रमुख कॉलेजों में अब एडमिशन एंट्रेंस टेस्ट के आधार पर लिया जा रहा है। इससे केवल 10वीं के अंकों पर निर्भरता कम हो गई है और चयन प्रक्रिया और अधिक प्रतिस्पर्धी बन गई है।

प्रमुख कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया कड़ी, अलग-अलग नियम लागू

कुछ प्रमुख संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया इस प्रकार है—

  • कुछ कॉलेजों में एडमिशन केवल एंट्रेंस परीक्षा के आधार पर होगा
  • कई संस्थानों में मेरिट लिस्ट के जरिए चयन किया जाएगा
  • कुछ कॉलेजों में कटऑफ 80 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच गया है

इससे छात्रों के लिए सही कॉलेज चुनना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।

सीटों की सीमित संख्या से बढ़ी चिंता, अच्छे छात्रों को भी संघर्ष

कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि इस बार सीटों की तुलना में आवेदन ज्यादा हैं। ऐसे में कई योग्य छात्र भी एडमिशन से वंचित रह सकते हैं।

नामांकन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों में उत्साह के साथ-साथ चिंता भी देखने को मिल रही है, क्योंकि मुकाबला पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है।

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