झारखंड: ठनका गिरने से दो बहनों की मौत, भाई की हालत गंभीर, अचानत बदले मौसम के बाद गिरी बिजली, घर में सो रहे बच्चों पर हुआ वज्रपात
Jharkhand: Two sisters die after being struck by lightning; brother in critical condition. Lightning struck following a sudden change in weather, hitting the children while they were sleeping at home.

दुमका। मानसून अभी झारखंड में खुलकर तो नहीं बरस रहा है, लेकिन आसमानी मौत खूब बरस रही है। बिजली गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गयी। घटना झारखंड के दुमका जिले की है। जहां शाम में हुई तेज बारिश और वज्रपात ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। काठीकुंड थाना क्षेत्र के बूढ़ीडंगाल गांव में आकाशीय बिजली गिरने से दो सगी बहनों की मौत हो गई, जबकि उनका भाई बेहोश होकर घायल हो गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।
घर के अंदर सो रहे थे तीनों बच्चे
जानकारी के अनुसार, मंगलवार शाम करीब 7 बजे तेज बारिश के साथ गर्जना हो रही थी। इसी दौरान शिवलाल मुर्मू के घर के पास अचानक जोरदार वज्रपात हुआ।उस समय शिवलाल अपनी पत्नी सोनामुनी बास्की और एक छोटे बच्चे के साथ घर के दरवाजे के पास बैठे थे, जबकि 11 वर्षीय मीरू मुर्मू, 6 वर्षीय अनिता मुर्मू और 13 वर्षीय देवीलाल मुर्मू घर के अंदर जमीन पर सो रहे थे।अचानक बिजली गिरने के बाद घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन जब कमरे में पहुंचे तो दोनों बहनें अचेत पड़ी थीं, जबकि देवीलाल भी बेहोशी की हालत में मिला।
दो बेटियों की मौके पर मौत
ग्रामीणों की मदद से तीनों बच्चों को संभाला गया, लेकिन तब तक मीरू मुर्मू और अनिता मुर्मू की मौत हो चुकी थी। घायल देवीलाल मुर्मू का स्थानीय स्तर पर इलाज कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है।दो बेटियों की एक साथ मौत से पूरा परिवार सदमे में है। मां सोनामुनी बास्की बार-बार अपनी बेटियों को याद कर बेसुध हो रही हैं, जबकि पिता शिवलाल मुर्मू भी गहरे सदमे में हैं।
एक कमरे के कच्चे घर में रहता था आठ सदस्यीय परिवार
परिजनों के अनुसार, मृतक बहनों के चार भाई हैं। इनमें एक भाई अभी इतना छोटा है कि उसे यह भी समझ नहीं है कि उसकी दोनों बहनें अब इस दुनिया में नहीं रहीं।ग्रामीणों के अनुसार, शिवलाल मुर्मू का परिवार बेहद आर्थिक तंगी में जीवन बिता रहा है।
पत्नी और छह बच्चों सहित आठ सदस्यीय परिवार एक मिट्टी और खपरैल से बने एक कमरे के कच्चे मकान में रहने को मजबूर था।स्थानीय लोगों का कहना है कि आज भी परिवार को पक्का आवास नहीं मिल सका है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सरकारी आवास योजनाओं के बावजूद यह परिवार अब तक पक्के घर से क्यों वंचित रहा।












