JSSC-CGL Protest: गले में फंदा डालकर सड़क पर उतरे चयनित अभ्यर्थी! प्रोजेक्ट भवन के बाहर तीसरे दिन भी हंगामा, सरकार से पूछा- अब हमारा क्या होगा?

Ranchi News: झारखंड में JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी झारखंड मंत्रालय यानी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन के कारण मुख्य गेट पर आवागमन बाधित रहा और अधिकारियों व कर्मचारियों को सचिवालय परिसर में प्रवेश करने में परेशानी हुई।
प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध जताया। अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन और नियुक्ति के बाद अचानक नौकरी समाप्त किए जाने से वे मानसिक और आर्थिक दबाव में हैं।
प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे अभ्यर्थी
चयनित अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के सामने ही धरना शुरू कर दिया है। बड़ी संख्या में लोग सड़क पर बैठकर सरकार से नियुक्ति रद्द करने का फैसला वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को धरना देने के लिए कुटे मैदान जाने को कहा गया था। हालांकि, अभ्यर्थियों ने वहां जाने से इनकार कर दिया।
उनका आरोप है कि शहर से दूर मैदान में भेजकर उनके आंदोलन को कमजोर करने और उनकी आवाज को सरकार तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की जा रही है।
गले में फंदा डालकर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान कुछ चयनित अभ्यर्थियों ने गले में फंदा डालकर अपना विरोध जताया। उनका कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और लंबी चयन प्रक्रिया के बाद सरकारी नौकरी हासिल की थी।
नियुक्ति मिलने के बाद करीब सात महीने तक सरकारी सेवा में काम करने के बावजूद अब नौकरी समाप्त किए जाने से उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।
हालांकि, ऐसे विरोध के दौरान अभ्यर्थियों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है और प्रशासन से भी स्थिति को संवेदनशील तरीके से संभालने की अपेक्षा है।
जनवरी 2024 से शुरू हुआ विवाद
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, JSSC-CGL परीक्षा का पहला चरण जनवरी 2024 में आयोजित हुआ था। परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और त्रुटियों के बाद इसे रद्द कर दिया गया।
इसके बाद सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। दूसरी परीक्षा के बाद भी मामला विवादों में रहा और इसे लेकर न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई।
अभ्यर्थियों के अनुसार मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। उनका दावा है कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
31 दिसंबर 2025 को मिले थे नियुक्ति पत्र
चयनित अभ्यर्थियों के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। इसके बाद उन्होंने सरकारी विभागों में काम करना शुरू कर दिया।
अब करीब सात महीने बाद नियुक्ति समाप्त किए जाने के फैसले ने चयनित अभ्यर्थियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
‘अब दोबारा परीक्षा कैसे दें?’
प्रदर्शनकारियों की सबसे बड़ी चिंता दोबारा परीक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि उन्हें फिर से परीक्षा देने की बात कही जा रही है, लेकिन चयन प्रक्रिया पूरी होने और नौकरी मिलने के बाद कई अभ्यर्थियों की उम्र अब निर्धारित आयु सीमा के करीब पहुंच चुकी है या कुछ मामलों में उससे अधिक हो गई है।
ऐसे में उनका तर्क है कि दोबारा परीक्षा में शामिल होने का विकल्प भी उनके लिए आसान नहीं है।
परिवार की जिम्मेदारी भी नौकरी से जुड़ी थी
चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी नौकरी मिलने के बाद उनके परिवारों की आर्थिक योजनाएं इसी आय पर निर्भर हो गई थीं। कई लोगों ने नौकरी के भरोसे परिवार की जिम्मेदारियां संभालीं।
अब नियुक्ति समाप्त होने के बाद उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अभ्यर्थी सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके मामले पर मानवीय और न्यायपूर्ण तरीके से विचार किया जाए।
मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार से हटने को तैयार नहीं हैं। उनकी मांग है कि नियुक्ति समाप्त करने का फैसला वापस लिया जाए और चयनित अभ्यर्थियों को न्याय दिया जाए।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के जुटने से प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने और सचिवालय की आवाजाही सामान्य बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।












